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BIHAR: 35 साल बाद मिला इंसाफ, बहन को पेड़ से बांधकर भाई की हत्या करने वाले 5 दोषियों को उम्रकैद

Muzaffarpur के अहियापुर इलाके में 1991 में हुए सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने 35 साल बाद बड़ा फैसला सुनाया। एडीजे-5 Alok Kumar Pandey की अदालत ने उमा राय की हत्या के मामले में पांच दोषियों को उम्रकैद और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

बिहार न्यूज
कोर्ट का बड़ा फैसला
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

MUZAFFARPUR: मुजफ्फरपुर से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, अपराधी कितना भी भाग ले आखिरकार वो पकड़े जाते हैं। अहियापुर थाना क्षेत्र से करीब 35 वर्ष पूर्व हुए रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-5) आलोक कुमार पांडेय की अदालत ने इस जघन्य अपराध के पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।


क्रूरता की पराकाष्ठा: क्या था पूरा मामला?

यह सनसनीखेज वारदात साल 1991 की है, जब जमीनी विवाद ने एक परिवार की खुशियां उजाड़ दी थीं। शिवयहां चर्तुभुज गांव में आरोपियों ने प्रतिशोध और लालच में आकर उमा राय नाम के व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी थी। वारदात की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हमलावरों ने उमा राय की बहन, बसंती देवी को घर के पास एक पेड़ से मजबूती से बांध दिया था। बहन बेबस होकर चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन पत्थर दिल दोषियों ने उसकी एक न सुनी और उसकी आंखों के सामने ही उसके भाई उमा राय को गोलियों से भून डाला। भाई की तड़प और बहन की बेबसी के उस मंजर ने पूरे इलाके को दहला दिया था।


न्याय की डगर में 35 साल की बाधाएं

लोक अभियोजक सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि इस मामले में न्याय मिलने में साढ़े तीन दशक का लंबा समय बीत गया। इसके पीछे कई गंभीर तकनीकी कारण थे। सबसे बड़ी बाधा यह थी कि घटना के बाद उमा राय का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की मृत्यु हो चुकी थी, जिससे मेडिकल साक्ष्य प्रस्तुत करने में चुनौती आई। इसके अतिरिक्त, केस के अनुसंधान (इन्वेस्टिगेशन) से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और कागजात भी समय के साथ ट्रेस नहीं हो पा रहे थे। इन प्रशासनिक और तकनीकी जटिलताओं के कारण मुकदमा वर्षों तक लंबित रहा, लेकिन पीड़ित पक्ष ने हार नहीं मानी और कानूनी लड़ाई जारी रखी।


अदालत का कड़ा रुख और सजा का ऐलान

अदालत ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए पांचों आरोपियों को हत्या सहित अन्य संबंधित धाराओं में दोषी पाया। सजा पाने वाले दोषियों में अहियापुर के शिवयहां चर्तुभुज निवासी बैद्यनाथ राय (77 वर्ष), महंथ राय (50 वर्ष), रामचंद्र पासवान (60 वर्ष), सहदेव राय (50 वर्ष) और मीनापुर के मोहनपुर निवासी रामबालक राय (70 वर्ष) शामिल हैं। उम्रकैद की सजा के साथ-साथ माननीय अदालत ने सभी पांचों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।


"आज मिली कलेजे को ठंडक": सूचक का बयान

इस कांड के सूचक और बसंती देवी के पुत्र मोहन राय ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मां की आंखों में वह खौफ और दर्द सालों तक देखा है। उन्होंने कहा, "मेरी मां को पेड़ से बांधकर उनके सगे भाई की हत्या की गई थी। वह दृश्य हमारे परिवार के लिए किसी डरावने सपने जैसा था। 35 सालों तक हमने अदालत की चौखट पर न्याय की आस में चक्कर काटे। आज जब फैसला आया है, तो ऐसा महसूस हो रहा है कि वाकई सत्य की जीत हुई है। देर से ही सही, मेरे मामा को इंसाफ मिला।"