ब्रेकिंग
क्या यही शराबबंदी है? ऑटो बना शराब तस्करी का जरिया, सहरसा पुलिस की बड़ी कार्रवाईदीपक प्रकाश 2-4 महीने नहीं बल्कि 2030 तक मंत्री रहेंगे, उपेंद्र कुशवाहा का बड़ा दावाचाय दुकान की आड़ में बिक रही थी प्रतिबंधित दवाइयां, रामनगर पुलिस ने की बड़ी कार्रवाईआय से अधिक संपत्ति मामले में सुरसंड BDO कृष्णा राम सस्पेंड, 79.56 लाख की अवैध संपत्ति का आरोपकुख्यात संतोष डॉन गिरोह पर EOU का शिकंजा, 25 ठिकानों पर एक साथ रेड, करोड़ों की संपत्ति जांच के घेरे मेंक्या यही शराबबंदी है? ऑटो बना शराब तस्करी का जरिया, सहरसा पुलिस की बड़ी कार्रवाईदीपक प्रकाश 2-4 महीने नहीं बल्कि 2030 तक मंत्री रहेंगे, उपेंद्र कुशवाहा का बड़ा दावाचाय दुकान की आड़ में बिक रही थी प्रतिबंधित दवाइयां, रामनगर पुलिस ने की बड़ी कार्रवाईआय से अधिक संपत्ति मामले में सुरसंड BDO कृष्णा राम सस्पेंड, 79.56 लाख की अवैध संपत्ति का आरोपकुख्यात संतोष डॉन गिरोह पर EOU का शिकंजा, 25 ठिकानों पर एक साथ रेड, करोड़ों की संपत्ति जांच के घेरे में

चोरनिया कांड में बड़ा एक्शन: SHO समेत पूरी टीम सस्पेंड, लापरवाही बरतने पर SSP ने की कार्रवाई

Bihar Police News: मुजफ्फरपुर के चोरनिया कांड में पुलिसकर्मियों की बड़ी लापरवाही उजागर होने के बाद एसएसपी ने बड़ा एक्शन लेते हुए थानाध्यक्ष समेत छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है. एसएसपी के इस एक्शन से जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है.

Bihar Police News
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Police News: बिहार के मुजफ्फरपुर में चर्चित चोरनिया कांड को लेकर एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गायघाट के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह समेत पूरी छापेमारी टीम को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ग्रामीण एसपी राजेश कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई, जिसमें ऑपरेशन के दौरान गंभीर लापरवाही उजागर हुई।


इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों के अनुसार छापेमारी के दौरान कई स्तरों पर चूक और जोखिम भरे निर्णय सामने आए, जिसके आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए।


घटना 17-18 मार्च की रात की है, जब गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव में पुलिस टीम पॉक्सो एक्ट के एक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पहुंची थी। छापेमारी के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए और स्थिति हिंसक हो गई थी। आरोप है कि पुलिस के पहुंचते ही आरोपियों ने शोर मचाकर ग्रामीणों को इकट्ठा कर लिया, जिसके बाद भीड़ ने पथराव, लाठी-डंडों और फायरिंग से पुलिस टीम पर हमला कर दिया था।


स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर पुलिस टीम को मौके से निकलने में भारी कठिनाई हुई। हालात को संभालने के लिए तत्कालीन थानाध्यक्ष को हवाई फायरिंग करनी पड़ी, जिसके बाद टीम किसी तरह वहां से निकल सकी। इस दौरान अफरा-तफरी में एक ग्रामीण जगतवीर राय की गोली लगने से मौत हो गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया।


घटना के बाद दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए। ग्रामीणों ने पुलिस पर सीधे फायरिंग का आरोप लगाया, जबकि पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाने की बात कही। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम से साक्ष्य जुटाए गए और मजिस्ट्रेट की निगरानी में विशेष जांच शुरू की गई।


जांच रिपोर्ट में सामने आया कि संवेदनशील इलाके में पर्याप्त पुलिस बल के बिना छापेमारी की गई और संभावित विरोध के बावजूद सतर्कता नहीं बरती गई। साथ ही हालात को संभालने में विवेकपूर्ण निर्णय की कमी भी पाई गई। इन खामियों के आधार पर एसएसपी ने थानाध्यक्ष सहित कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है, जबकि छापेमारी में शामिल दो गृह रक्षकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।


घटना ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। नेता पप्पू यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मृतक के घर पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग कर चुके हैं। इस कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।

रिपोर्टिंग
M

रिपोर्टर

MANOJ KUMAR

FirstBihar संवाददाता