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Bihar Politics : 'राजनीतिक मतभेद का जवाब हिंसा नहीं'— अभिषेक बनर्जी मामले पर मुकेश सहनी का बड़ा बयान, बोले - कार्यकर्ताओं पर लगाम लगाए BJP,

मुकेश सहनी ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर हमला बताया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों का जवाब हिंसा नहीं हो सकता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

Bihar Politics : 'राजनीतिक मतभेद का जवाब हिंसा नहीं'— अभिषेक बनर्जी मामले पर मुकेश सहनी का बड़ा बयान, बोले - कार्यकर्ताओं पर लगाम लगाए BJP,
Tejpratap
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Bihar Politics : विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ हुई कथित मारपीट की घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर हमला बताया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान हिंसा नहीं, बल्कि संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए।


शनिवार को जारी एक बयान में मुकेश सहनी ने कहा कि भारत का लोकतंत्र विविध विचारों, राजनीतिक बहुलता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की मजबूत परंपरा पर आधारित है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल या नेता के खिलाफ असहमति व्यक्त करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन असहमति को हिंसा और मारपीट के माध्यम से व्यक्त करना किसी भी सभ्य लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं हो सकता।


उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक विरोधियों को डराने, धमकाने या उन पर शारीरिक हमला करने जैसी घटनाओं को बढ़ावा दिया जाता है, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी। सहनी ने जोर देकर कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक कार्यकर्ता पर हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था पर भी सीधा प्रहार है।


वीआईपी प्रमुख ने इस मामले को गंभीर बताते हुए भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा को पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेना चाहिए और अपने कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों पर लगाम लगानी चाहिए। उनका आरोप था कि भाजपा का चाल, चलन और चेहरा लगातार असहिष्णु राजनीति को बढ़ावा देने वाला दिखाई दे रहा है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।


मुकेश सहनी ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों के प्रति आक्रामक रवैया और टकराव की राजनीति देशहित में नहीं है। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि उसके कार्यकर्ता कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करें तथा किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधियों से दूर रहें।


उन्होंने कहा कि देश की राजनीति का केंद्र जनहित, विकास, संवाद और बहस होना चाहिए। लोकतंत्र में विचारों का टकराव स्वाभाविक है, लेकिन उसे व्यक्तिगत हमलों और हिंसक घटनाओं में बदलना लोकतांत्रिक संस्कृति को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संयम, जिम्मेदारी और सहिष्णुता का परिचय देना आवश्यक है।


सहनी ने कहा कि आज देश को ऐसी राजनीति की जरूरत है जो जनता के मुद्दों पर केंद्रित हो और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होनी चाहिए, न कि ऐसी जो हिंसा और वैमनस्य को जन्म दे। वीआईपी प्रमुख ने अभिषेक बनर्जी के साथ हुई घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटनाओं पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।


अपने बयान के अंत में मुकेश सहनी ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। देश की लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक मूल्यों और राजनीतिक शुचिता को बनाए रखने के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती संवाद, सहिष्णुता और कानून के शासन में निहित है, और इन मूल्यों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।