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पेपरलेस रजिस्ट्री से जमीन की खरीद-बिक्री प्रभावित, राजस्व में भारी कमी का दावा, कातिबों में असंतोष

मधुबनी समेत बिहार में पेपरलेस रजिस्ट्री को लेकर कातिबों में असंतोष है। कातिब संघ का दावा है कि जमीन की खरीद-बिक्री प्रभावित होने से रजिस्ट्री कार्यालयों में लोगों की संख्या और राजस्व दोनों घटे हैं।

बिहार न्यूज
अब क्या करेंगे कातिब?
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

MADHUBANI: मधुबनी जिले समेत पूरे बिहार में लागू पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर कातिबों में असंतोष देखने को मिल रहा है। कातिबों का कहना है कि पेपरलेस रजिस्ट्री के कारण जमीन की खरीद-बिक्री प्रभावित हुई है और रजिस्ट्री कार्यालयों में खरीदार एवं विक्रेताओं की संख्या में कमी आई है।


कातिबों के अनुसार, इस नई व्यवस्था का सीधा असर उनकी आमदनी पर भी पड़ा है। उनका कहना है कि पेपरलेस रजिस्ट्री के बाद कई खरीदारों और विक्रेताओं को बैंक से ऋण लेने तथा जमीन का दाखिल-खारिज कराने में परेशानी हो रही है।


कातिबों का आरोप है कि ऑनलाइन रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेज होने के बावजूद बैंक ऋण देने में कठिनाई होती है। वहीं, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि पूरी रजिस्ट्री की पीडीएफ उपलब्ध कराने के बाद ही कई मामलों में बैंक ऋण और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया आगे बढ़ पाती है।


कातिब संघ के अध्यक्ष मथुरानंद झा ने पेपरलेस व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए कहा कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया कागजी दस्तावेजों के साथ भी जारी रहनी चाहिए, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


कातिबों के मुताबिक, पेपरलेस रजिस्ट्री को लेकर मधुबनी के अलावा बेनीपट्टी, जयनगर, फुलपरास, झंझारपुर और खजौली स्थित रजिस्ट्री कार्यालयों में भी लोगों की आवाजाही कम हुई है। उनका दावा है कि इसका असर जमीन की खरीद-बिक्री के साथ-साथ सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी पड़ा है।

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