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ना डॉक्टर-कर्मचारी हैं औऱ ना ऑक्सीजन: सरकार ने मधेपुरा मेडिकल अस्पताल को कोविड डेडिकेटेड बनाने का एलान कर दिया

MADHEPURA : बिहार सरकार ने मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल को 500 बेड वाला कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाने का फैसला ले लिया है. अस्पताल के अधिकारियों को इस

ना डॉक्टर-कर्मचारी हैं औऱ ना ऑक्सीजन: सरकार ने मधेपुरा मेडिकल अस्पताल को कोविड डेडिकेटेड बनाने का एलान कर दिया
Santosh Singh
3 मिनट

MADHEPURA :  बिहार सरकार ने मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल को 500 बेड वाला कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाने का फैसला ले लिया है. अस्पताल के अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गयी है. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि इस अस्पताल में अभी कोविड मरीजों के लिए बनाये गये 102 बेड पर ही सही से इलाज नहीं हो पा रहा है. उनके लिए सही से न डॉक्टर-नर्स उपलब्ध हैं और न ऑक्सीजन. फिर 500 बेड का अस्पताल कैसे चल पायेगा.

शुक्रवार की शाम वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान राज्य सरकार के आलाधिकारियों ने मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल  को कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाने की सूचना दी. सरकार ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्राचार्य औऱ अधीक्षक को निर्देश दिया कि अगले आदेश तक इस अस्पताल में सिर्फ कोरोना के मरीजों का इलाज किया जाएगा. इस मेडिकल कॉलेज अस्पताल की क्षमता 500 बेड की है. सरकार ने सभी बेड पर कोविड पेशेंट को ही भर्ती करने का निर्देश दिया. दूसरे मरीजों के लिए OPD से लेकर इमरजेंसी तक की सुविधा बंद कर दी जायेगी. 


डॉक्टर न ऑक्सीजन, इलाज कैसे होगा

हैरानी की बात ये है कि सरकार ने मधेपुरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्थिति को समझे बगैर उसे 500 बेड का कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाने का फैसला ले लिया है. वस्तुस्थिति ये है कि अब तक अस्पताल के 500 बेड में से 102 बेड कोविड मरीजों के लिए रिजर्व रखे गये थे. मेडिकल कॉलेज प्रशासन उनके लिए ही सही तरीके से इलाज की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है. अस्पताल में डॉक्टरों से लेकर पारा मेडिकल स्टाफ के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हुए हैं.

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑक्सीजन की भारी किल्लत

इस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑक्सीजन की भी किल्लत लगातार बनी हुई है. मेडिकल कॉलेज के प्लांट से सिर्फ 10 ऑक्सीजन सिलेंडर भरे जा रहे हैं. पूर्णिया में ऑक्सीजन प्लांट है लेकिन उससे जिला स्वास्थ्य समिति को आपूर्ति दी जा रही है. 10 ऑक्सीजन सिलेंडर में तो 10 मरीज का इलाज हो पाना मुश्किल है. फिर 500 मरीजों का क्या होगा.

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