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चिकन नेक को सुरक्षित करने के लिए अंडरग्राउंड ब्लास्ट प्रूफ रेल परियोजना, कटिहार-किशनगंज से गुजरेगा बड़ा कॉरिडोर

Chicken Neck Corridor: केंद्र सरकार ने चिकन नेक कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए 51 हजार करोड़ की अंडरग्राउंड रेल परियोजना शुरू की है, जो बिहार के कटिहार और किशनगंज से होकर गुजरेगी।

​Chicken Neck Corridor
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Chicken Neck Corridor: केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाले संवेदनशील “चिकन नेक” कॉरिडोर को सुरक्षित करने के लिए करीब 51 हजार करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी अंडरग्राउंड रेल परियोजना शुरू की है। इस परियोजना का उद्देश्य सामरिक सुरक्षा को मजबूत करना और पूर्वोत्तर राज्यों से देश के बाकी हिस्सों की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाना है।


इस परियोजना के तहत लगभग 170 किलोमीटर लंबी डबल अंडरग्राउंड रेलवे लाइन बनाई जाएगी, जिसका एक बड़ा हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा। इसमें से 45.68 किलोमीटर ट्रैक बिहार के कटिहार और किशनगंज जिलों से गुजरेगा, जबकि शेष हिस्सा पश्चिम बंगाल के मालदा और जलपाईगुड़ी जिलों में होगा। यह अत्याधुनिक रेल कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के कुमेदपुर से शुरू होकर आमबाड़ी-फालाकाटा तक जाएगा।


चिकन नेक मात्र 20 से 25 किलोमीटर चौड़ा संकरा भू-भाग है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ता है। यह क्षेत्र नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन की सीमाओं के पास स्थित होने के कारण अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। किसी भी आपातकाल या युद्ध जैसी स्थिति में इस मार्ग के बाधित होने का खतरा रहता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए यह भूमिगत रेल कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है, जो वैकल्पिक और सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा।


इस परियोजना से बिहार के किशनगंज, ठाकुरगंज और गलगलिया जैसे सीमावर्ती इलाकों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और माल ढुलाई कारोबार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


यह रेल लाइन सामान्य नहीं बल्कि पूरी तरह ब्लास्ट-प्रूफ और आपदा-रोधी होगी। टनल बोरिंग मशीन (TBM) की मदद से जमीन के नीचे दोहरी सुरंगें बनाई जाएंगी, जिनमें भविष्य में बुलेट ट्रेन संचालन की भी क्षमता होगी। आपातकालीन स्थिति में इस सुरंग का उपयोग बंकर के रूप में भी किया जा सकेगा, जिससे नागरिकों और सैन्य संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।


इस परियोजना में हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम, 2×25 केवी एसी इलेक्ट्रिफिकेशन और 25 टन भार क्षमता वाले मजबूत ढांचे शामिल होंगे। इससे सेना की आवाजाही, हथियारों और रसद की सप्लाई बेहद तेज और सुरक्षित तरीके से हो सकेगी।


इस विशाल परियोजना का डिजाइन और भू-तकनीकी सर्वेक्षण महाराष्ट्र की मोनार्क एजेंसी को सौंपा गया है, जिसका काम दिसंबर 2024 में शुरू हो चुका है। सरकार ने इसे वर्ष 2033 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पहले भी इस कॉरिडोर को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं। यह परियोजना केंद्र की भारतामाला और एक्ट ईस्ट पॉलिसी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता