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'जवानी तोहार गार देम ...', काली पूजा के नाम अश्लील गानों पर रात भर थिरकती रहीं बार बालाएं, अब वीडियो हुआ वायरल

Bihar News: कटिहार जिले के आजमनगर थाना क्षेत्र में काली पूजा के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने धार्मिक आयोजन की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मर्वतपुर पंचायत के सिहपुर रेल गेट के पास आयोजित पूजा पंडाल में...

'जवानी तोहार गार देम ...', काली पूजा के नाम अश्लील गानों पर रात भर थिरकती रहीं बार बालाएं, अब वीडियो हुआ वायरल
Ramakant kumar
3 मिनट

Bihar News: मर्यादा, भक्ति और श्रद्धा… ये शब्द जब किसी धार्मिक आयोजन से जुड़े होते हैं तो एक अलग ही पवित्रता का एहसास होता है। लेकिन जब इसी आस्था के मंच पर मर्यादाएं टूट जाएं और भक्ति की जगह भड़काऊ माहौल हावी हो जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है कटिहार के आजमनगर थाना क्षेत्र से, जहां काली पूजा के आयोजन ने विवाद खड़ा कर दिया है।


मर्वतपुर पंचायत के सिहपुर रेल गेट के पास ‘पहली बैशाख’ के मौके पर मां काली की पूजा का आयोजन किया गया था। उम्मीद थी कि यहां भक्तिमय माहौल होगा, लोग पूजा-अर्चना करेंगे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा। लेकिन जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे आयोजन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए।


बताया जा रहा है कि पूजा पंडाल में मां काली की प्रतिमा के सामने ही रातभर बार बालाओं का डांस चलता रहा। भोजपुरी के द्विअर्थी और भड़काऊ गानों पर खुलेआम ठुमके लगाए गए। माहौल ऐसा था कि यह धार्मिक आयोजन कम और मनोरंजन का मंच ज्यादा नजर आ रहा था।


हैरानी की बात यह रही कि इस पूरे कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, लेकिन किसी ने इसका विरोध करना जरूरी नहीं समझा। आयोजन समिति भी बेफिक्र दिखी—न कानून का डर, न सामाजिक मर्यादाओं की चिंता। सिहपुर रेल गेट जैसे सार्वजनिक स्थान पर पूरी रात यह सब चलता रहा।


अब सबसे बड़ा सवाल स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहा है। क्या आजमनगर थाना को इस आयोजन की जानकारी नहीं थी? या फिर जानकारी होने के बावजूद नजरअंदाज किया गया? स्थानीय लोगों के बीच यही चर्चा तेज है कि इतनी बड़ी घटना के दौरान प्रशासन की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े करती है।


इस घटना के सामने आने के बाद इलाके के प्रबुद्ध वर्ग और आम लोगों में नाराजगी साफ देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि मां काली जैसे शक्ति स्वरूप की पूजा को इस तरह के आयोजनों से जोड़ना न केवल गलत है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देता है। धार्मिक आयोजनों की आड़ में इस तरह की गतिविधियां आस्था की मूल भावना को ठेस पहुंचाती हैं।


सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने इस मामले को और तूल दे दिया है। अब यह सिर्फ एक स्थानीय आयोजन का मामला नहीं रह गया, बल्कि प्रशासन और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पर भी सवाल बन गया है। लोग मांग कर रहे हैं कि इस आयोजन के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।