Bihar News : बिहार में पंजीकृत दो गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल आयकर विभाग की जांच के दायरे में आ गए हैं। विभाग को आशंका है कि इन दलों का इस्तेमाल कथित तौर पर राजनीतिक चंदे की आड़ में टैक्स बचाने और धन के लेनदेन को वैध दिखाने के लिए किया गया। शुरुआती जांच में करीब 6,000 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आया है। हालांकि, आयकर विभाग ने अभी तक इन दोनों राजनीतिक दलों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं और मामले की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं की है।
आयकर विभाग के अनुसार, यह पूरा मामला राजनीतिक चंदे के जरिए आयकर अधिनियम की धारा 80GGC के तहत मिलने वाली कर छूट के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि कुछ गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खातों में दानदाता बैंकिंग माध्यम से बड़ी रकम जमा कराते थे। इसके बाद उसी राशि का अधिकांश हिस्सा विभिन्न खातों और कथित बिचौलियों के जरिए नकद या अन्य माध्यमों से दानदाता तक वापस पहुंचा दिया जाता था।
10 लाख के चंदे में 9 लाख लौटाने का आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति या कंपनी ने 10 लाख रुपये का चंदा दिया, तो कथित तौर पर लगभग 9 लाख रुपये वापस कर दिए जाते थे। बची हुई राशि को कमीशन के रूप में रखा जाता था। इसके बावजूद दानदाता पूरे 10 लाख रुपये पर आयकर छूट का दावा कर देते थे। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
बिहार के दो दलों की गतिविधियां संदिग्ध
जांच के दौरान बिहार में पंजीकृत दो गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की वित्तीय गतिविधियां संदिग्ध पाई गई हैं। फिलहाल आयकर विभाग इन दलों के बैंक खातों, लेनदेन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रहा है। अधिकारियों ने अभी किसी दल का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, क्योंकि जांच जारी है।
कई राज्यों में हुई छापेमारी
मामले की जांच के सिलसिले में हाल के दिनों में दिल्ली, सूरत और अहमदाबाद सहित कई शहरों में छापेमारी की गई। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
18 महीने पहले शुरू हुई थी जांच
सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग ने करीब 18 महीने पहले इस मामले की जांच शुरू की थी। टैक्स रिफंड और कर संग्रह के आंकड़ों में असामान्य अंतर मिलने के बाद विभाग को संदेह हुआ था कि राजनीतिक चंदे के जरिए बड़े पैमाने पर कर छूट का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके बाद वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल शुरू की गई।
अन्य कंपनियों और व्यक्तियों की भी जांच
आयकर विभाग अब केवल राजनीतिक दलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन कंपनियों, संस्थाओं और व्यक्तियों की भी भूमिका की जांच कर रहा है जिन्होंने कथित रूप से इस व्यवस्था का लाभ उठाया। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ आयकर कानून और अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में आयकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। ऐसे में बिहार के दो गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से जुड़े इस कथित 6,000 करोड़ रुपये के संदिग्ध चंदा मामले पर सभी की नजर बनी हुई है।





