ब्रेकिंग
अशोकधाम भगदड़ के बाद अलर्ट मोड में सरकार, अंतिम सोमवारी और पूर्णिमा के मौके पर 10 अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति, पूरी लिस्ट देखिएपश्चिम चंपारण बस हादसा: पांच लोगों की मौत के बाद सड़क पर उतरे परिजन, शव सड़क पर रखकर की मुआवजे की मांगलुंगी पहनकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे विधायक IP गुप्ता, पत्रकारों से बोले-‘मोदी जी मेरे सपने में आए थे’ पटना में डराने लगी गंगा: भद्र घाट और महावीर घाट की सड़क पर पानी; SDRF और NDRF को अलर्ट रहने के निर्देशस्कूल से लौट रही छात्रा पर धारदार हथियार से हमला, गर्दन पर गंभीर चोट; हालत नाजुक अशोकधाम भगदड़ के बाद अलर्ट मोड में सरकार, अंतिम सोमवारी और पूर्णिमा के मौके पर 10 अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति, पूरी लिस्ट देखिएपश्चिम चंपारण बस हादसा: पांच लोगों की मौत के बाद सड़क पर उतरे परिजन, शव सड़क पर रखकर की मुआवजे की मांगलुंगी पहनकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे विधायक IP गुप्ता, पत्रकारों से बोले-‘मोदी जी मेरे सपने में आए थे’ पटना में डराने लगी गंगा: भद्र घाट और महावीर घाट की सड़क पर पानी; SDRF और NDRF को अलर्ट रहने के निर्देशस्कूल से लौट रही छात्रा पर धारदार हथियार से हमला, गर्दन पर गंभीर चोट; हालत नाजुक

बिहार : मुखिया के अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे पैसे, गांव वालों ने चंदा इकट्ठा कर की अंत्‍येष्टि

KAIMUR : बिहार के कैमूर जिले में मुखिया के निधन के बाद उनके शव के दाह संस्कार के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने चंदा जुटाया और उनका अंतिम संस्कार किया. बताया जा रहा है कि मुखिया के परिजन

बिहार : मुखिया के अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे पैसे, गांव वालों ने चंदा इकट्ठा कर की अंत्‍येष्टि
First Bihar
2 मिनट

KAIMUR : बिहार के कैमूर जिले में मुखिया के निधन के बाद उनके शव के दाह संस्कार के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने चंदा जुटाया और उनका अंतिम संस्कार किया. बताया जा रहा है कि मुखिया के परिजनों के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह मुखिया का अंतिम संस्कार कर पाते इसलिए ग्रामीणों ने पैसे जुटाकर मुखिया का अंतिम संस्कार किया. 


घटना कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड स्थित सिरबिट पंचायत की बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार, मुखिया शिवमूरत मुसहर का निधन लंबी बीमारी के चलते हो गया. उन्हें सांस से जुड़ी बीमारी थी. इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. ग्रामीणों ने बताया कि मुखिया की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. लंबे समय से वह सरकार से अनुसूचित जनजाति के लिए बनाई गई कॉलोनी में अपना गुजर-बसर कर रहे थे.जीवनयापन के लिए बीपीएल धारी होने के चलते उन्हें जनवितरण प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक महीने राशन मिलता था. इसी से उनका गुजर-बसर होता था. आय का और कोई अन्य साधन नहीं था. 


मुखिया का सारा काम उनके प्रतिनिधि ही करते थे. वहीं मुखिया के निधन के बाद उनके परिजनों ने मुखिया प्रतिनिधि पर कई आरोप लगाए हैं.  ग्रामीणों की माने तो मुखिया के निधन होने के बाद मुखिया के दाह संस्कार के लिए भी मुखिया के  परिजनों के पास पैसे नहीं थे. स्थानीय कुछ लोगों ने चंदा जुटाकर शिवमूरत मुसहर के शव का अंतिम संस्‍कार किया.