पटना: जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने विधायकों और विधान पार्षदों को संसदीय कार्यप्रणाली की बेहतर समझ देने के लिए शुक्रवार को एक विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम शुरू किया। पटना स्थित जेडीयू कार्यालय के कर्पूरी सभागार में सुबह 11 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद पहुंचे। कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बड़ी संख्या में विधायक और विधान पार्षद मौजूद रहे।
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जेडीयू के जनप्रतिनिधियों को सदन की कार्यप्रणाली, संसदीय नियमों और प्रभावी तरीके से सवाल उठाने की प्रक्रिया की जानकारी देना है। पार्टी की ओर से संसदीय कार्यप्रणाली के विशेषज्ञों को भी बुलाया गया है, जो विधायकों और एमएलसी को अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षण देंगे।
नीतीश कुमार खुद पहुंचे पार्टी कार्यालय
जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के कार्यक्रम में पहुंचने को पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है। कर्पूरी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन नीतीश कुमार किया । इस दौरान मंच पर निशांत कुमार भी उनके साथ नजर आए। इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विधायक और विधान पार्षद भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा समेत पार्टी के कई प्रमुख नेता मौजूद हैं। दिनभर चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को सदन में बेहतर तरीके से अपनी बात रखने के तौर-तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
निशांत कुमार का भी जिक्र, नई पीढ़ी के लिए बढ़ी दिलचस्पी
जेडीयू के इस कार्यक्रम को लेकर पार्टी के भीतर नई पीढ़ी के नेताओं और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा है। निशांत कुमार का नाम भी जेडीयू के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में चर्चा में रहता है। हालांकि इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आधिकारिक फोकस पार्टी के विधायकों और विधान पार्षदों को संसदीय प्रशिक्षण देने पर है।
निशांत कुमार को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चाएं लगातार होती रही हैं। ऐसे में नीतीश कुमार की मौजूदगी वाले इस कार्यक्रम के साथ निशांत कुमार का संदर्भ भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। हालांकि कार्यक्रम के आधिकारिक एजेंडे में किसी राजनीतिक उत्तराधिकार या संगठनात्मक बदलाव को लेकर कोई घोषणा सामने नहीं आई है।
संजय झा ने बताया कार्यक्रम का उद्देश्य
जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इस पहल के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी अपने जनप्रतिनिधियों की संसदीय कार्यप्रणाली की समझ को मजबूत करना चाहती है। पार्टी की कोशिश है कि विधायक और विधान पार्षद सदन के नियमों और प्रक्रियाओं को अच्छी तरह समझें और उसका प्रभावी इस्तेमाल करें।
प्रशिक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों को बताया जाएगा कि सदन में सवाल किस तरीके से पूछे जाएं, किसी महत्वपूर्ण मुद्दे को किस प्रक्रिया के तहत उठाया जाए और अपने विधानसभा क्षेत्र या क्षेत्र से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से सरकार के सामने कैसे रखा जाए।
विशेषज्ञ देंगे संसदीय कार्यप्रणाली की ट्रेनिंग
जेडीयू ने इस कार्यक्रम के लिए बाहर से संसदीय कार्यप्रणाली के विशेषज्ञों को बुलाया है। कार्यक्रम का संचालन PRS Legislative Research की ओर से किए जाने की जानकारी पार्टी ने दी है। विशेषज्ञों की ओर से विधायकों और विधान पार्षदों को सदन की कार्यवाही से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। इसमें प्रश्न पूछने की प्रक्रिया, संसदीय नियम, बहस में भाग लेने का तरीका और क्षेत्रीय मुद्दों को सदन में प्रभावी तरीके से रखने जैसे विषय शामिल हैं।
नीतीश के लंबे राजनीतिक अनुभव का भी रहेगा प्रभाव
नीतीश कुमार खुद लंबे समय तक बिहार की राजनीति और सदन की कार्यवाही के केंद्र में रहे हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनके लंबे कार्यकाल के अलावा वे केंद्र की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। ऐसे में जेडीयू के मौजूदा विधायकों और विधान पार्षदों के लिए पार्टी अध्यक्ष की मौजूदगी में होने वाला यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी का जोर अब अपने जनप्रतिनिधियों की संसदीय सक्रियता को बेहतर बनाने पर है। इसके लिए विशेषज्ञों के प्रशिक्षण के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
दिनभर चलने वाले इस कार्यक्रम में अलग-अलग सत्र आयोजित किए जाएंगे। जेडीयू के विधायकों और एमएलसी को उम्मीद है कि प्रशिक्षण के बाद वे विधानसभा और विधान परिषद में सवालों और मुद्दों को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से उठा सकेंगे।
कुल मिलाकर, जेडीयू का यह ओरिएंटेशन कार्यक्रम पार्टी के मौजूदा जनप्रतिनिधियों को संसदीय कामकाज की बारीकियां समझाने की पहल है। कार्यक्रम में नीतीश कुमार की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से चर्चा में ला दिया है, जबकि निशांत कुमार का संदर्भ पार्टी की नई पीढ़ी को लेकर चल रही चर्चाओं के कारण अतिरिक्त दिलचस्पी पैदा कर रहा है।





