JAMUI: जमुई रेलवे स्टेशन पर लगे एलईडी डिस्प्ले बोर्ड की एक तकनीकी गलती इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। बोर्ड पर 'राजेंद्र नगर-हावड़ा एक्सप्रेस' की जगह 'राजद नगर-हावड़ा एक्सप्रेस' दिखाए जाने से यात्रियों के बीच हंसी-मजाक के साथ रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 23.36 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक रूप ले रहे जमुई रेलवे स्टेशन पर एक छोटी सी लेकिन चर्चित गलती इन दिनों यात्रियों के बीच हंसी और चर्चा का कारण बनी हुई है। स्टेशन पर लगे एलईडी डिस्प्ले बोर्ड पर ट्रेन संख्या 12352 राजेंद्र नगर–हावड़ा एक्सप्रेस का नाम गलत तरीके से “राजद नगर–हावड़ा एक्सप्रेस” दिखाया गया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
एलईडी बोर्ड पर “राजद नगर” लिखा देखकर यात्री पहले तो चौंके, फिर मुस्कुराते नजर आए। कई यात्रियों ने इसे मजाक में बदलते हुए कहा कि अब “भाजपा एक्सप्रेस” भी चला देनी चाहिए, ताकि सभी राजनीतिक दलों की ट्रेनें चल सकें। हालांकि कुछ यात्रियों ने इसे रेलवे की गंभीर लापरवाही बताते हुए सवाल उठाया कि कई दिनों से यह गलती रहने के बावजूद अब तक सुधार क्यों नहीं किया गया।
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए गए और रेलकर्मियों को जानकारी दी गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह एलईडी बोर्ड प्लेटफॉर्म संख्या दो पर पैनल केबिन और उप स्टेशन अधीक्षक कक्ष के ठीक ऊपर लगा है, जहां कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी रहती है, फिर भी गलती नजरअंदाज हो रही है।
यात्रियों ने स्टेशन की अन्य समस्याओं पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि पीने के पानी की व्यवस्था लंबे समय से खराब है, कई पंखे बंद पड़े हैं और शौचालयों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। इसके अलावा एलईडी बोर्ड पर कई बार कोच पोजीशन भी गलत दिखाई जाती है, जिससे यात्री भ्रमित हो जाते हैं और ट्रेन पकड़ने में परेशानी होती है।
स्टेशन मास्टर से पूछे जाने पर उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि “इस बारे में दानापुर मंडल से पूछिए।” इस जवाब से यात्रियों में और अधिक नाराजगी फैल गई। अब यात्रियों की मांग है कि रेलवे प्रशासन न केवल इस तकनीकी गलती को तुरंत सुधारे, बल्कि स्टेशन की मूलभूत सुविधाओं में भी सुधार करे, ताकि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे आधुनिक स्टेशन पर यात्रियों को वास्तविक सुविधा मिल सके।







