Bihar AI Cyber Fraud: बिहार के जमुई जिले से साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. बरहट प्रखंड में साइबर अपराधी अब AI तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं. आरोप है कि ठगों ने सरकारी पोर्टल पर मौजूद म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) आवेदकों का डेटा हासिल कर लिया है और उसी के आधार पर लोगों को फोन कर रुपये मांग रहे हैं. अब तक 100 से ज्यादा लोगों को ऐसे कॉल किए जा चुके हैं, जबकि 40 से अधिक लोग शिकायत लेकर बरहट अंचल कार्यालय पहुंच चुके हैं.
जानकारी के मुताबिक, साइबर अपराधी 9031685133 नंबर से फोन कर खुद को बिहार भूमि सर्वे, पटना या बरहट अंचल कार्यालय का कर्मचारी बताते हैं. कॉल करने वाली महिला लोगों से कहती है कि उनका म्यूटेशन आवेदन रिजेक्ट हो गया है और उसे पास कराने के लिए 1000 से 2000 रुपये देने होंगे. इसके साथ ही आधार कार्ड, केवाला और जमीन से जुड़े अन्य दस्तावेज भी मांगे जाते हैं.
इस मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ठगों ने AI तकनीक की मदद से बरहट की राजस्व अधिकारी क्रांति कुमारी जैसी आवाज तैयार कर ली है. कई लोग जब शिकायत लेकर अंचल कार्यालय पहुंचे तो उन्होंने राजस्व अधिकारी से कहा कि उन्होंने ही फोन कर पैसे मांगे थे. बाद में जब अधिकारियों ने जांच की तो पता चला कि उनकी आवाज की हूबहू नकल कर लोगों को झांसे में लिया जा रहा है.
अंचल प्रशासन के अनुसार, वर्ष 2018 से 2026 तक बरहट अंचल में करीब 9 हजार म्यूटेशन आवेदन दर्ज किए गए हैं. इनमें से 8925 मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि 75 आवेदन अभी लंबित हैं. ऑनलाइन रिकॉर्ड में आवेदकों का नाम, मोबाइल नंबर, गांव, खाता, खेसरा और जमीन से जुड़ी दूसरी जानकारी मौजूद है. आशंका है कि इसी जानकारी का इस्तेमाल कर साइबर अपराधी लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं.
बरहट अंचल में कार्यरत सरकारी अमीन महेंद्र यादव ने भी बताया कि उन्हें इसी नंबर से फोन आया था. कॉल करने वाले ने एक जमीन के म्यूटेशन के नाम पर 2000 रुपये की मांग की. सबसे हैरानी की बात यह थी कि उसके पास संबंधित आवेदक की पूरी जानकारी पहले से मौजूद थी. इसके बाद मामले की सूचना अधिकारियों को दी गई.
मलयपुर निवासी रूपल सिंह, रणधीर ताती, मनीष सिंह और बरहट निवासी चंदन कुमार समेत कई लोगों को भी ऐसे कॉल आए. कुछ लोगों से आधार कार्ड और जमीन के कागजात मांगे गए, जबकि कुछ को व्हाट्सएप पर लिंक भेजकर दस्तावेज अपलोड करने के लिए कहा गया. कई लोगों को क्यूआर कोड या स्कैनर भेजकर पैसे जमा करने का दबाव भी बनाया गया. संदेह होने पर जब लोगों ने अंचल कार्यालय से संपर्क किया तो वे ठगी का शिकार होने से बच गए.
राजस्व अधिकारी क्रांति कुमारी ने बताया कि कई मामलों में लोगों को लिंक या पीडीएफ भेजी जा रही है. ऐसे लिंक खोलने या दस्तावेज अपलोड करने से मोबाइल हैक होने का खतरा हो सकता है. इसके जरिए साइबर अपराधी बैंक खाते तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं. इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी अनजान व्यक्ति के साथ निजी दस्तावेज साझा करें.
इस घटना के बाद सरकारी पोर्टल पर मौजूद लोगों के डेटा की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर आवेदकों की जानकारी साइबर अपराधियों तक कैसे पहुंची. क्या डेटा लीक हुआ है या किसी तकनीकी कमजोरी का फायदा उठाया गया है, इसकी जांच की जा रही है.
बरहट के अंचल अधिकारी मयंक अग्रवाल ने साफ कहा कि कार्यालय का कोई भी कर्मचारी फोन कर म्यूटेशन या किसी सरकारी काम के बदले पैसे नहीं मांगता. वहीं साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई सरकारी अधिकारी बनकर पैसे, ओटीपी, बैंक की जानकारी या दस्तावेज मांगे तो तुरंत सतर्क हो जाएं. किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें, साइबर पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज कराएं या नजदीकी साइबर थाना से संपर्क करें.
जमुई से धीरज कुमार सिंह की रिपोर्ट





