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6 साल की मासूम के साथ दरिंदगी का सच 12 साल बाद आया सामने—डॉक्टर की जिद ने खोला राज, दोषी को उम्रकैद की सजा

Bihar News: बिहार के जमुई से जुड़ा एक मामला चर्चा में है, जहां एक पुरानी घटना में आखिरकार पीड़िता को न्याय मिला। इस पूरी कहानी में एक डॉक्टर की पहल ने अहम भूमिका निभाई, जिसने मामले को आगे बढ़ाने में मदद...

6 साल की मासूम के साथ दरिंदगी का सच 12 साल बाद आया सामने—डॉक्टर की जिद ने खोला राज, दोषी को उम्रकैद की सजा
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar News: कभी-कभी इंसाफ देर से जरूर मिलता है, लेकिन जब मिलता है तो एक मिसाल बन जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी सामने आई है जमुई की एक बेटी की, जिसके साथ बचपन में हुई दरिंदगी का सच 12 साल बाद सामने आया और आखिरकार उसे न्याय मिला, वो भी एक डॉक्टर की संवेदनशीलता और हिम्मत की बदौलत।


यह मामला सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि उस जज्बे की मिसाल है, जिसमें एक अनजान डॉक्टर ने किसी और की बेटी के लिए लड़ाई लड़ी और उसे इंसाफ दिलाकर ही दम लिया। नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में तैनात डॉक्टर सुनीता कुमारी ने इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभाई।


करीब 12 साल पहले, जब पीड़िता महज 6 साल की थी, तब उसके ही गांव के एक व्यक्ति ने उसके साथ गंभीर अपराध किया। उस उम्र में न तो वह विरोध कर पाई और न ही किसी को पूरी तरह समझा पाई कि उसके साथ क्या हुआ। घटना के बाद उसका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया, लेकिन परिवार सामाजिक दबाव और डर के कारण चुप रहा।


समय बीतता गया और जब वही बच्ची 16 साल की हुई, तो उसकी तबीयत और ज्यादा खराब हो गई। मुंह और कान से खून आने जैसी गंभीर समस्या के कारण उसे इलाज के लिए दिल्ली लाया गया। कई जगह इलाज के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तब उसकी काउंसलिंग शुरू हुई।


यहीं से इस कहानी ने नया मोड़ लिया। काउंसलिंग के दौरान किशोरी ने जो बताया, उसने सबको झकझोर कर रख दिया। उसने बचपन की उस घटना का जिक्र किया, जिसे वह वर्षों से अपने भीतर दबाए बैठी थी। यह सुनकर डॉक्टर सुनीता ने सिर्फ इलाज तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि न्याय दिलाने की ठान ली।


जब डॉक्टर ने पीड़िता के परिवार को केस दर्ज कराने के लिए कहा, तो वे समाज और लोकलाज के डर से पीछे हट गए। लेकिन डॉक्टर ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद आगे बढ़कर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को जानकारी दी और ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करवाई।


इस मामले में 29 अप्रैल 2024 को जमुई महिला थाना में केस दर्ज हुआ और अगले ही दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान डॉक्टर सुनीता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी अहम गवाही दी।


इस केस की सुनवाई पोक्सो कोर्ट में हुई, जहां जज महेश्वर दुबे ने सभी तथ्यों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा दी और उस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। साथ ही, पीड़िता के पुनर्वास के लिए 7 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया गया।


यह मामला कई मायनों में खास है। एक तो इसलिए कि इतनी पुरानी घटना के बावजूद सच्चाई सामने आई और न्याय मिला। दूसरा, इसलिए कि इसमें एक डॉक्टर ने सिर्फ अपनी ड्यूटी नहीं निभाई, बल्कि इंसानियत का फर्ज भी अदा किया।