Tender Scam : टेंडर घोटाले में घिरे आईएएस अधिकारी योगेश सागर की एक ऐसी गुप्त विदेश यात्रा का खुलासा हुआ है, जिसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। ऑस्ट्रिया की यह यात्रा न सिर्फ छिपाई गई, बल्कि इसके खर्च को छिपाने के लिए कोड वर्ड, रिश्तेदारों के नाम और कथित तौर पर कैश भुगतान तक का इस्तेमाल किया गया। सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ, जब पत्नी के खाते से जमा की गई रकम और वास्तविक खर्च के बीच भारी अंतर सामने आया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया है कि जून 2024 में आईएएस योगेश सागर अपनी आईआरएस अधिकारी पत्नी अवलोकिता अशोक के साथ ऑस्ट्रिया गए थे। लेकिन इस पूरी यात्रा को बेहद गोपनीय रखा गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, यात्रा के खर्च को छिपाने के लिए ‘एसएस’ और ‘जैनाम’ जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया।
कोड वर्ड से हुआ बड़ा खुलासा
ईडी की जांच में पता चला कि ‘एसएस’ का मतलब साहिल सिन्हा और ‘जैनाम’ का संबंध जैनम एंगीकॉन कंपनी से था। जांच एजेंसी के मुताबिक, साहिल सिन्हा कथित घोटाले के मुख्य आरोपी रिशुश्री का करीबी सहयोगी है, जबकि जैनम एंगीकॉन कंपनी भी उसी नेटवर्क से जुड़ी बताई जा रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि विदेश यात्रा के खर्च को सीधे तौर पर दिखाने के बजाय इन कोड वर्ड्स के जरिए भुगतान की व्यवस्था की गई थी।
ट्रैवल एजेंसी पर छापे के बाद खुली परतें
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब वर्ष 2025 में ईडी ने सूरत स्थित ‘लम्बुजी टूर प्राइवेट लिमिटेड’ के ठिकानों पर छापेमारी की। इसी एजेंसी ने ऑस्ट्रिया यात्रा के एयर टिकट और होटल बुकिंग की व्यवस्था की थी। ईडी के दस्तावेजों के अनुसार, योगेश सागर इस यात्रा को पूरी तरह गोपनीय रखना चाहते थे। इसी कारण टिकट और होटल बुकिंग उनके रिश्तेदारों धम्म प्रिया, अशोक और सहर्ष राज अशोक के नाम पर कराई गई थी। जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि वास्तविक यात्रियों की पहचान छिपाने के लिए जानबूझकर दूसरे नामों का इस्तेमाल किया गया।
21.92 लाख का खर्च, लेकिन खाते से निकले सिर्फ 4.27 लाख
सबसे बड़ा सवाल इस विदेश यात्रा के खर्च को लेकर खड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि ऑस्ट्रिया यात्रा पर कुल 21.92 लाख रुपये खर्च किए गए। इसमें नई दिल्ली से वियना तक की फ्लाइट, होटल बुकिंग और अन्य खर्च शामिल थे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि आईआरएस अधिकारी अवलोकिता अशोक के बैंक खाते से केवल 4.27 लाख रुपये का ही भुगतान हुआ। बाकी बची लगभग 17.65 लाख रुपये की राशि कहां से आई, यही सवाल जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बन गया। ईडी के अनुसार, यह रकम कथित तौर पर साहिल सिन्हा और जैनम एंगीकॉन कंपनी की ओर से ट्रैवल एजेंसी तक पहुंचाई गई। कुछ भुगतान नकद में किए गए और कुछ लेन-देन कथित कोड वर्ड के जरिए दर्ज किए गए।
पांच दिन की रिमांड में रिशुश्री से 45 घंटे पूछताछ
उधर, इस मामले के मुख्य आरोपी रिशुश्री को विशेष सतर्कता इकाई (SVU) ने पांच दिनों की रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, करीब 45 घंटे तक चली पूछताछ में जांच अधिकारियों ने उसके सामने कई दस्तावेज और साक्ष्य रखे।
बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद आरोपी को बेउर जेल भेज दिया गया, जहां उसका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।
संजीव हंस और पवन कुमार की तलाश तेज
इस मामले में अब जांच एजेंसियों की नजर आईएएस अधिकारी संजीव हंस और पवन कुमार पर भी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। हाल ही में एसवीयू की टीम ने पवन कुमार के बेउर स्थित ठिकाने पर छापेमारी की थी। अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस कथित घोटाले और विदेश यात्रा से जुड़े नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक विदेश यात्रा थी या फिर इसके पीछे किसी बड़े आर्थिक नेटवर्क की कहानी छिपी हुई है। इसका जवाब आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई से सामने आ सकता है।





