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दो दशक से अधर में लटकी लालू प्रसाद के गांव से गुजरने वाली हथुआ-भटनी रेल लाइन परियोजना, 18 वर्ष में पूरा हुआ महज 40% काम; आखिर क्या है वजह?

Hathua Bhatni Rail Line: पूर्वोत्तर रेलवे की हथुआ-भटनी नई रेल लाइन परियोजना पिछले 18 वर्षों से अधर में लटकी हुई है. 79.4 किलोमीटर में केवल 40% कार्य ही पूरा हो सका है. इलाके के लोगों को अब भी इस रूट के चालू होने की उम्मीद है.

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
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Mukesh Srivastava
2 मिनट

Hathua Bhatni Rail Line: पूर्वोत्तर रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल हथुआ-भटनी नई रेल लाइन का निर्माण लंबे समय से रुका हुआ है। विभागीय स्वीकृति मिलने के बावजूद इस परियोजना को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है। 79.4 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन का लगभग 40 प्रतिशत ही कार्य पूरा हो पाया है।


पूर्वोत्तर रेलवे ने इस परियोजना को वर्ष 2005-06 में मंजूरी दी थी। योजना के तहत हथुआ को उत्तर प्रदेश के भटनी से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन बिछाई जानी थी। शुरुआती दौर में भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य तेजी से शुरू हुआ, लेकिन बाद में धन की कमी के कारण काम की रफ्तार धीमी पड़ गई। इस रेलखंड का राजनीतिक और सामाजिक महत्व भी है, क्योंकि यह क्षेत्र लालू प्रसाद यादव के पैतृक गांव फुलवरिया और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के मायके सेलार कला से होकर गुजरता है।


पहले चरण में 26 गांवों की जमीन का अधिग्रहण कर रेल लाइन बिछाने का काम पूरा किया गया और फुलवरिया से हथुआ तक ट्रेनों का परिचालन शुरू हो गया। दूसरे चरण में बथुआ से भटनी तक के लिए 57 गांवों की जमीन का अधिग्रहण शुरू हुआ, लेकिन केवल 18 गांवों की जमीन ही अधिग्रहित की जा सकी। शेष 39 गांवों में धन की कमी के कारण भूमि अधिग्रहण का कार्य अटका हुआ है। इस चरण के लिए करीब 1.81 अरब रुपये की आवश्यकता बताई गई है।


अधिग्रहित 18 गांवों की जमीन पर निर्माण कार्य वर्ष 2018 में पूरा कर दिया गया और पंचदेवरी तक ट्रेनों का परिचालन शुरू हो गया। हालांकि पंचदेवरी के पास भठवां गांव के आगे नई रेल लाइन का निर्माण लंबे समय से ठप पड़ा हुआ है। 18 वर्ष पहले इस परियोजना की घोषणा के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीदें थीं कि भटनी तक सीधा मार्ग बन जाएगा, लेकिन परियोजना के अधर में लटके रहने से उनकी उम्मीदें धीरे-धीरे टूट रही हैं।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता