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Bihar News : DM को गुमराह, फिर गिरफ्तारी… और थाने से फरार! पुलिस कस्टडी से भागा माइनिंग इंस्पेक्टर,अवैध बालू खनन सिंडिकेट पर बड़ा खुलासा

गोपलगंज में अवैध बालू खनन केस में गिरफ्तार माइनिंग इंस्पेक्टर थाने से फरार। प्रशासन में हड़कंप, माफिया-ऑफिसर गठजोड़ पर सवाल।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 21, 2026, 9:07:34 AM

Bihar News : DM को गुमराह, फिर गिरफ्तारी… और थाने से फरार! पुलिस कस्टडी से भागा माइनिंग इंस्पेक्टर,अवैध बालू खनन सिंडिकेट पर बड़ा खुलासा

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Bihar News : बिहार के गोपालगंज जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अवैध बालू खनन मामले में गिरफ्तार एक माइनिंग इंस्पेक्टर थाने से ही फरार हो गया। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि खनन माफिया और अधिकारियों की कथित मिलीभगत को भी उजागर कर दिया है।


मिली जानकारी के अनुसार, जिले के दियारा क्षेत्र में अवैध बालू खनन की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी को लेकर जिला पदाधिकारी (डीएम) पवन कुमार सिन्हा के निर्देश पर जादोपुर थाने में खनन निरीक्षक सौरभ अभिषेक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शुक्रवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद वह थाने से फरार हो गए।


दरअसल, सदर प्रखंड के दियारा क्षेत्र में स्थित 12 बालू घाटों की पिछले सत्र में नीलामी नहीं हो सकी थी। इस वर्ष भी नीलामी नहीं होने पर डीएम ने खनन विभाग से जवाब तलब किया। विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई कि जिले में अब कोई सक्रिय बालू घाट नहीं है और सभी घाट खेतों में तब्दील हो चुके हैं। इस जवाब से संतुष्ट न होने पर डीएम खुद मौके पर निरीक्षण के लिए पहुंचे।


निरीक्षण के दौरान खनन निरीक्षक सौरभ अभिषेक ने डीएम को वास्तविक स्थल पर ले जाने के बजाय करीब चार किलोमीटर तक इधर-उधर घुमाने की कोशिश की। इस पर संदेह होने पर डीएम खुद वास्तविक घाटों तक पहुंचे, जहां अवैध खनन का खुलासा हुआ। मौके पर जेसीबी मशीनें और डंपर भी पहले से हटाए जा चुके थे, जिससे यह आशंका और मजबूत हो गई कि अधिकारियों को पहले ही सूचना दे दी गई थी।


जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद डीएम ने तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया, जिसके बाद जादोपुर थाने में केस दर्ज कर खनन निरीक्षक को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, देर शाम उनके थाने से फरार हो जाने की खबर सामने आई, जिसकी पुष्टि देर रात अधिकारियों ने भी कर दी। फिलहाल पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।


इस घटना के बाद जिले में हड़कंप मच गया है। खासकर अवैध खनन से जुड़े लोगों में डर का माहौल है। बरौली सहित गंडक नदी के कई इलाकों में पहले भी अवैध खनन की शिकायतें मिल चुकी हैं। लेकिन इस तरह एक अधिकारी का ही मामले में संलिप्त पाया जाना और फिर उसका फरार हो जाना, पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


गौरतलब है कि बिहार में खनन माफिया और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। कई बार छापेमारी करने गई टीमों पर हमले भी हो चुके हैं। माना जाता है कि अंदरूनी जानकारी लीक होने के कारण माफिया पहले से सतर्क हो जाते हैं और कार्रवाई से बच निकलते हैं। राज्य में ऐसे कई मामलों में अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।


अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक गिरफ्तार आरोपी थाने से कैसे फरार हो गया? क्या इसमें भी किसी की लापरवाही या मिलीभगत है? पुलिस और प्रशासन के सामने अब न केवल फरार इंस्पेक्टर को पकड़ने की चुनौती है, बल्कि पूरे सिस्टम की साख बचाने की भी जिम्मेदारी है।