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तेजस्वी के मुंहबोले चचेरे मामा पर ED की नजर!.. 42 करोड़ की संपत्ति जांच के घेरे में

गोपालगंज पुलिस ने कथित भू-माफिया गंगदयाल यादव और उनके परिजनों की 42 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध संपत्तियों की जांच के लिए ED और आर्थिक अपराध इकाई को प्रस्ताव भेजा है। मामला अब मनी लॉन्ड्रिंग जांच की ओर बढ़ता दिख रहा है।

बिहार न्यूज
EOU और ED की भू-माफिया पर नजर
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

GOPALGANJ: गोपालगंज में भू-माफिया गंगदयाल यादव के खिलाफ अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU)की बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। गोपालगंज पुलिस ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच को लेकर ईडी और आर्थिक अपराध इकाई को आधिकारिक प्रस्ताव भेज दिया है।


पुलिस जांच में गंगदयाल यादव और उसके परिजनों के नाम पर 42 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध चल एवं अचल संपत्तियां चिन्हित की गई हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान इन संपत्तियों के संबंध में कोई वैध और संतोषजनक आय स्रोत प्रस्तुत नहीं किया जा सका। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये संपत्तियां अपराध से अर्जित धन यानी “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” से बनाई गई हो सकती हैं। 


इसी आधार पर अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गंगदयाल यादव के खिलाफ हत्या के प्रयास, रंगदारी, जालसाजी, धोखाधड़ी समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उपलब्ध साक्ष्यों, आपराधिक इतिहास, आरोप पत्रों और परिसंपत्तियों के विवरण के आधार पर आर्थिक अपराध इकाई और ईडी को विस्तृत प्रतिवेदन भेजा गया है। 


इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि गंगदयाल यादव को लंबे समय से लालू परिवार का बेहद करीबी माना जाता रहा है। स्थानीय राजनीति में उन्हें राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार से जुड़ा प्रभावशाली चेहरा बताया जाता है। इतना ही नहीं, इलाके में उन्हें बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का चचेरा मामा कहा जाता है। ऐसे में अब इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है और विपक्ष इसे लेकर सवाल उठाने लगा है। 


गोपालगंज पुलिस ने साफ किया है कि संगठित अपराध और अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे अन्य अपराधियों की संपत्तियों की भी जांच कर आर्थिक अपराध इकाई और ईडी को कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजे जाएंगे। फिलहाल 42 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध संपत्तियों पर जांच एजेंसियों की नजर टिकी हुई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि ईडी और आर्थिक अपराध इकाई इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है?

गोपालगंज से नमो नारायण मिश्रा की रिपोर्ट