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गोपालगंज में 37 करोड़ से बनी मॉडल सदर अस्पताल की खुली पोल, पहली बारिश में फॉल्स सीलिंग टूटी और पाइपलाइन से बहने लगा पानी

Bihar News: गोपालगंज में तेज आंधी और बारिश के बाद 37 करोड़ रुपये की लागत से बने मॉडल सदर अस्पताल की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। अस्पताल परिसर में कई जगह नुकसान की खबरों ने निर्माण कार्य की मजबूती और निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। अब इस

गोपालगंज में 37 करोड़ से बनी मॉडल सदर अस्पताल की खुली पोल, पहली बारिश में फॉल्स सीलिंग टूटी और पाइपलाइन से बहने लगा पानी
Ramakant kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार के गोपालगंज जिले में तेज आंधी और बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से बने मॉडल सदर अस्पताल की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस अस्पताल में पहली तेज बारिश के बाद ही कई खामियां सामने आ गईं.


अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार की फॉल्स सीलिंग आंधी के दौरान क्षतिग्रस्त हो गई. सीलिंग के कई हिस्से टूटकर नीचे लटक गए. गनीमत रही कि जिस समय यह घटना हुई, वहां कोई मरीज या परिजन मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया.


घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. कर्मचारियों और मरीजों के बीच इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई कि अगर इतनी जल्दी भवन की स्थिति खराब हो रही है तो आने वाले समय में मरीजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी.


इसके अलावा अस्पताल में लगे फायर फाइटिंग सिस्टम की पाइपलाइन से भी लगातार पानी का रिसाव होने लगा. जिस सिस्टम को आग जैसी आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए लगाया गया है, उसी व्यवस्था में खराबी सामने आने के बाद अब इसकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं.


स्थानीय लोगों का कहना है कि मॉडल सदर अस्पताल से जिले के लोगों को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी. करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए भवन में इस तरह की समस्या सामने आना निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.


लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि निर्माण में किसी तरह की लापरवाही हुई है या नहीं. अगर जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए.


अस्पताल प्रशासन की ओर से फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है. वहीं विशेषज्ञों की मदद से भवन की सुरक्षा जांच कराने की जरूरत भी बताई जा रही है.