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ऑक्सीजन पाइपलाइन की बदहाली ने खोली सरकार की पोल, अस्पताल के बजाय एम्बुलेंस में हुआ मरीज का इलाज

Bihar News: पूर्वी चंपारण के पताही सीएचसी में स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। लाखों रुपये की लागत से बनी ऑक्सीजन पाइपलाइन चालू नहीं होने के कारण मरीज का इलाज अस्पताल के वार्ड की बजाय एम्बुलेंस में करना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल...

ऑक्सीजन पाइपलाइन की बदहाली ने खोली सरकार की पोल, अस्पताल के बजाय एम्बुलेंस में हुआ मरीज का इलाज
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar News: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों की पोल खोल देती है। ऐसा ही एक मामला पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आया है, जहां लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई ऑक्सीजन पाइपलाइन सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है। हालत यह है कि अस्पताल में भर्ती मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए वार्ड के बजाय एम्बुलेंस का सहारा लेना पड़ा।


सोमवार को पताही पूर्वी पंचायत निवासी रामनरेश साह की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर परिजन उन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद जो स्थिति सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया। अस्पताल के वार्डों में ऑक्सीजन पाइपलाइन तो लगी थी, लेकिन उसमें गैस सप्लाई ही नहीं हो रही थी। मजबूरी में मरीज को अस्पताल परिसर में खड़ी एम्बुलेंस के अंदर ले जाकर ऑक्सीजन दिया गया।


इस घटना के बाद अस्पताल की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों का कहना है कि मरीजों को बेड पर ही ऑक्सीजन सुविधा देने के लिए लाखों रुपये खर्च कर पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन आज तक उसे चालू नहीं किया गया। पाइपलाइन दीवारों पर जरूर दिखाई देती है, मगर वह किसी काम की नहीं है।


स्थानीय लोगों के मुताबिक ठेकेदार ने पाइपलाइन बिछाने का काम तो पूरा कर दिया, लेकिन मुख्य कनेक्शन और आउटलेट सिस्टम अधूरा छोड़ दिया। अस्पताल में न तो कंट्रोल पैनल सही तरीके से लगाया गया और न ही रेगुलेटर सिस्टम चालू किया गया। यही वजह है कि पाइपलाइन में ऑक्सीजन का दबाव ही नहीं बन पा रहा है।


सबसे हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के स्टोर रूम में कई ऑक्सीजन सिलेंडर मौजूद हैं, लेकिन पाइपलाइन से जुड़ाव नहीं होने के कारण उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। अगर व्यवस्था सही होती, तो मरीज को एम्बुलेंस के छोटे सिलेंडर के भरोसे इलाज नहीं कराना पड़ता।


अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस के अंदर मरीज का इलाज होता देख लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। लोगों का आरोप है कि ऑक्सीजन पाइपलाइन योजना में सरकारी पैसे का बंदरबांट हुआ है और बिना काम पूरा किए ही कागजों पर योजना को पूरा दिखा दिया गया।


मरीज के परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ऑक्सीजन पाइपलाइन को चालू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि अस्पताल में सिर्फ दिखावे के लिए पाइपलाइन लगा दी गई है, जबकि जरूरत के समय मरीजों को बुनियादी सुविधा तक नहीं मिल पा रही।


अस्पताल की दीवारों पर लगी पीली पाइपलाइन अब केवल शोपीस बनकर रह गई है। न उसमें ऑक्सीजन का दबाव है और न ही मरीजों तक गैस पहुंचाने की कोई व्यवस्था। बिना वाल्व, प्रेशर गेज और सही कनेक्शन के पूरी योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।

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