Bihar News : शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लागू किए गए ई-शिक्षाकोष पोर्टल में गड़बड़ी करने वाले शिक्षकों पर अब विभाग का शिकंजा कसने लगा है। विभागीय जांच में बारसोई प्रखंड के तीन शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में अनियमितता सामने आने के बाद जिला शिक्षा विभाग ने उनसे स्पष्टीकरण तलब किया है। संबंधित शिक्षकों को 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।
जानकारी के अनुसार विभागीय समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कुछ शिक्षकों ने विद्यालय में मौजूद हुए बिना ही ई-शिक्षाकोष पोर्टल के "मार्क ऑन ड्यूटी" (एमओडी) विकल्प का उपयोग कर अपनी उपस्थिति दर्ज कर दी। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि जिन स्थानों से उपस्थिति दर्ज की गई, वे उनके कार्यस्थल विद्यालयों से काफी दूरी पर स्थित थे।
कार्रवाई की जद में प्राथमिक विद्यालय कस्बाटोली के शिक्षक मुन्ना मुस्ताक, उत्क्रमित मध्य विद्यालय छोघरा की शिक्षिका शालू सिंह तथा प्राथमिक विद्यालय नरौल के शिक्षक मोहम्मद सरेमुल हक शामिल हैं। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार शालू सिंह ने बक्सर जिले के राजपुर क्षेत्र से अपनी उपस्थिति दर्ज की, जबकि अन्य दो शिक्षकों ने कटिहार जिले के कोढ़ा एवं अन्य क्षेत्रों से हाजिरी लगाई। यह स्थिति तब सामने आई जब विभाग ने पोर्टल पर दर्ज लोकेशन और शिक्षकों के विद्यालयों की स्थिति का मिलान किया।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि "मार्क ऑन ड्यूटी" सुविधा का उद्देश्य उन शिक्षकों और कर्मियों के लिए है, जो किसी सरकारी बैठक, प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यालयी कार्य या अन्य विभागीय दायित्वों के निर्वहन में विद्यालय से बाहर रहते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी की अनुमति के आधार पर एमओडी का उपयोग किया जाता है। लेकिन जांच में पाया गया कि संबंधित शिक्षकों की ओर से इस सुविधा का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं किया गया।
विभागीय सूत्रों के अनुसार संबंधित तिथियों की उपस्थिति रिपोर्ट, लोकेशन डेटा और अन्य अभिलेखों की जांच के दौरान कई विसंगतियां सामने आईं। शिक्षकों की वास्तविक मौजूदगी और पोर्टल पर दर्ज जानकारी में अंतर पाए जाने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। शिक्षा विभाग ने इसे केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि सेवा दायित्वों के प्रति लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का मामला माना है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया संबंधित शिक्षकों का आचरण विभागीय निर्देशों तथा सरकारी सेवकों के लिए निर्धारित आचार संहिता के विपरीत प्रतीत होता है। इसलिए उनसे तत्काल स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।
जिला शिक्षा पदाधिकारी राहुल चंद्र चौधरी ने बताया कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल की नियमित निगरानी की जा रही है और उपस्थिति से जुड़े मामलों की गंभीरता से समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जा रहा है और किसी भी स्तर पर अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 2005 के तहत दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। विभाग का मानना है कि शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे विद्यार्थियों के लिए अनुशासन, ईमानदारी और जिम्मेदारी के आदर्श भी होते हैं। ऐसे में नियमों की अनदेखी शिक्षा व्यवस्था की साख पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। फिलहाल सभी की नजर शिक्षकों द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।





