PATNA: बिहार के किशनगंज से कांग्रेसी सांसद मो. जावेद के बयान से नया विवाद खड़ा होने की संभावना उत्पन्न हो गई है. मो. जावेद ने कहा कि बिहार में उर्दू भाषा के साथ सरकार अन्याय कर रही है. जबकि उर्दू हिन्दुस्तान की अपनी भाषा है. सांसद ने कहा कि संस्कृत विदेशी भाषा है, जैसे अंग्रेजी विदेश से भारत में आई वैसे ही संस्कृत विदेश से हिन्दुस्तान में आई.
क्या कहा सांसद ने?
कांग्रेसी सांसद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बिहार में उर्दू शिक्षकों की बहाली नहीं की जा रही है. जबकि बिहार में उर्दू दूसरी राजभाषा है. हम उर्दू को खत्म करने नहीं देंगे. इसके लिए जो भी करना है वह करेंगे.
संस्कृत बाहर से आई
सांसद मो. जावेद ने कहा कि उर्दू हिन्दुस्तानियों की जुबान है. ये कहीं बाहर से आई हुई भाषा नहीं है. जबकि संस्कृत बाहर से आई हुई भाषा है. जैसे अंग्रेजी देश में बाहर से आई, वैसे ही संस्कृत विदेश से भारत में आई. हिन्दुस्तान की अपनी भाषा तो उर्दू और हिन्दी है.
उर्दू को खत्म नहीं होने देंगे
मो. जावेद ने कहा कि उर्दू हिन्दुस्तान में पैदा हुई भाषा है. इसको हम खत्म नहीं होने देंगे. हम इसके लिए हर लड़ाई लड़ने को तैयार है. दरअसल, सांसद का आरोप था कि बिहार सरकार अपने सरकारी स्कूलों में उर्दू के शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर रही है.
वैसे, सांसद मो. जावेद के बयान से नया सियासी बखेड़ा खडा होने की संभावना है. संस्कृत को भारत की सबसे प्राचीन भाषा माना जाता रहा है. लेकिन मो. जावेद ने संस्कृत को विदेशी भाषा करार दिया है.





