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BIHAR NEWS : शराबबंदी पर चिराग पासवान का बड़ा बयान! बोले- जिस मकसद से कानून बना, वो पूरा नहीं हुआ ... अब समीक्षा जरूरी

बिहार में शराबबंदी को लेकर चिराग पासवान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून की समीक्षा होनी चाहिए और जरूरत के मुताबिक इसमें संशोधन किया जाना चाहिए।

BIHAR NEWS : शराबबंदी पर चिराग पासवान का बड़ा बयान! बोले- जिस मकसद से कानून बना, वो पूरा नहीं हुआ ... अब समीक्षा जरूरी
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

Bihar News : बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। अब केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने शराबबंदी कानून को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। चिराग पासवान ने सीधे तौर पर शराबबंदी खत्म करने की मांग तो नहीं की, लेकिन कानून की समीक्षा और जरूरी संशोधन की वकालत जरूर कर दी है।

चिराग पासवान का बयान ऐसे समय में आया है, जब बिहार में शराबबंदी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि जिस उद्देश्य और सोच के साथ राज्य में शराबबंदी कानून लागू किया गया था, वह उद्देश्य पूरी तरह हासिल हुआ या नहीं, इसकी समीक्षा जरूरी है।

‘समीक्षा होनी चाहिए, तभी पता चलेगा कितना सफल हुआ कानून’

चिराग पासवान ने कहा कि शराबबंदी जिस सोच के साथ लागू की गई थी, उस कसौटी पर यह कानून पूरी तरह खरा उतरा है या नहीं, इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उनके मुताबिक कानून की समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शराबबंदी कितनी सफल रही और अगर कहीं कमी रह गई है तो उसके पीछे आखिर वजह क्या है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर अपने सभी घटक दलों के साथ बैठकर चर्चा करनी चाहिए। कानून में जहां भी बदलाव की जरूरत महसूस हो, वहां जरूरी संशोधन किए जाने चाहिए।

चिराग का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह बिहार की सत्ताधारी गठबंधन राजनीति का हिस्सा हैं। ऐसे में शराबबंदी जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनके बयान ने चर्चा को और तेज कर दिया है।

जहरीली शराब से मौतों पर भी उठाया सवाल

चिराग पासवान ने शराबबंदी के दौरान सामने आने वाली जहरीली शराब की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य में अक्सर जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत की खबरें सामने आती हैं। इसका मतलब कहीं न कहीं शराब का अवैध कारोबार अभी भी मौजूद है।उन्होंने सवाल उठाया कि अगर शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार जारी है और लोग जहरीली शराब के शिकार हो रहे हैं, तो इस पूरे सिस्टम पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।चिराग के मुताबिक सिर्फ कानून बना देना ही पर्याप्त नहीं है। कानून को लागू करने के साथ-साथ यह भी देखना जरूरी है कि उसके पीछे जो सामाजिक उद्देश्य था, वह जमीन पर कितना हासिल हुआ है।

जागरूकता की कमी भी बनी बड़ी चुनौती

चिराग पासवान ने शराबबंदी को लेकर जागरूकता के मुद्दे पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस स्तर की जागरूकता समाज में होनी चाहिए थी, वह अभी तक पूरी तरह हासिल नहीं हुई है।यानी मामला सिर्फ शराब की बिक्री और खरीद पर रोक लगाने तक सीमित नहीं है। इसके साथ सामाजिक जागरूकता, अवैध कारोबार पर रोक और कानून के प्रभाव की नियमित समीक्षा भी जरूरी है। उनके बयान से यह संकेत साफ है कि वह शराबबंदी को पूरी तरह खत्म करने की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि मौजूदा व्यवस्था की कमियों को पहचानकर उसमें आवश्यक बदलाव के पक्ष में हैं।

गठबंधन की राजनीति में बयान के मायने

बिहार में शराबबंदी लंबे समय से राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा रही है। विपक्ष जहां इसे लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से कानून को सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जाता रहा है।

ऐसे में चिराग पासवान का यह कहना कि कानून की समीक्षा होनी चाहिए, राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। खासकर इसलिए क्योंकि उन्होंने यह भी कहा कि समीक्षा के बाद ही पता चलेगा कि कानून कितना सफल रहा और अगर सफल नहीं रहा तो उसके पीछे क्या कारण हैं। अब सवाल यह है कि क्या सरकार शराबबंदी कानून के मौजूदा प्रावधानों की समीक्षा के लिए गठबंधन के सभी दलों के साथ कोई औपचारिक बैठक करेगी? और अगर समीक्षा होती है तो क्या कानून में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?

क्या शराबबंदी कानून में होगा बदलाव?

चिराग पासवान ने शराबबंदी हटाने की सीधी मांग नहीं की है। उनका जोर कानून की समीक्षा और जरूरत के मुताबिक संशोधन पर है। इसलिए उनके बयान को फिलहाल शराबबंदी के खिलाफ सीधा राजनीतिक रुख मानना जल्दबाजी होगी।

हालांकि, इतना जरूर है कि उनके बयान ने बिहार में शराबबंदी को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। जहरीली शराब से होने वाली मौतें, अवैध शराब का कारोबार और जागरूकता की कमी जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

अब निगाहें सरकार और गठबंधन के दूसरे दलों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। अगर इस मुद्दे पर घटक दलों के बीच औपचारिक चर्चा शुरू होती है, तो आने वाले दिनों में शराबबंदी कानून में बदलाव की संभावनाओं को लेकर सियासी पारा और चढ़ सकता है।फिलहाल चिराग पासवान का संदेश साफ है—शराबबंदी खत्म करने की मांग नहीं, लेकिन कानून की समीक्षा जरूर होनी चाहिए। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग को कितनी गंभीरता से लेती है।