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सरकारी अस्पताल में मरने के बाद भी नहीं मिली एंबुलेंस, ठेले पर शव बांधकर ले गए परिजन; VIDEO वायरल

Chhapra Sadar Hospital Viral Video: बिहार में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच छपरा सदर अस्पताल से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली, तो परिजन ठेले पर...

सरकारी अस्पताल में मरने के बाद भी नहीं मिली एंबुलेंस, ठेले पर शव बांधकर ले गए परिजन; VIDEO वायरल
Ramakant kumar
4 मिनट

Chhapra Sadar Hospital Viral Video: बिहार सरकार भले ही जनता को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे दिखाती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों की पोल खोल देती है. छपरा सदर अस्पताल से सामने आया एक वीडियो इसी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है. पोस्टमार्टम के बाद शव को घर ले जाने के लिए परिजनों को एंबुलेंस नहीं मिली तो उन्होंने शव को ठेले पर रखा और रस्सी से बांधकर ले जाने को मजबूर हो गए.


मामला सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था और शव वाहन की उपलब्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और एंबुलेंस मैनेजर समेत संबंधित कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है.


जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतक के परिजनों ने शव को घर ले जाने के लिए 102 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस की मांग की थी. परिजनों का कहना है कि उन्होंने एंबुलेंस के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया.


जब काफी इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली तो परिजनों के सामने शव को ठेले पर ले जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा. इसके बाद शव को ठेले पर रखा गया और रस्सी से बांधकर परिजन उसे लेकर अस्पताल से निकल गए.


शव को ठेले पर ले जाने का VIDEO हुआ वायरल

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया. वीडियो में परिजन शव को ठेले पर रखकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं. घटना का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों ने सवाल उठाए.


उपलब्ध जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान नगर थाना क्षेत्र के आजाद नगर करीमचक मोहल्ला निवासी सुदामा प्रसाद के बेटे सन्नी कुमार के रूप में बताई जा रही है. हालांकि, मृतक के नाम को लेकर उपलब्ध जानकारी में अंतर है. ऐसे में प्रकाशन से पहले इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है.


मामला सामने आने और वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया. एंबुलेंस मैनेजर समेत संबंधित कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. अब संबंधित कर्मियों की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.


सदर अस्पताल जैसे सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव को घर ले जाने के लिए वाहन नहीं मिलना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. सवाल यह भी है कि जब 102 एंबुलेंस सेवा के लिए निर्धारित व्यवस्था मौजूद है, तो जरूरत के समय परिजनों को शव ठेले पर ले जाने की नौबत क्यों आई.


फिलहाल प्रशासन ने मामले में स्पष्टीकरण मांगा है. जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के पीछे क्या वजह थी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है.