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Bihar MLC News : बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता पर क्यों नहीं चली विपक्ष की मांग? शपथ से पहले दल-बदल कानून का फंस गया पेंच..

बिहार विधान परिषद में 18 नवंबर को नए MLC की शपथ हो सकती है। शिक्षक और स्नातक कोटे की 8 सीटों पर चुनाव के बाद सदन की तस्वीर बदलने वाली है। नवल किशोर यादव और मदन मोहन झा जैसे दिग्गज बाहर होंगे, जबकि कई नए चेहरे एंट्री करेंगे।

Bihar MLC News : बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता पर क्यों नहीं चली विपक्ष की मांग? शपथ से पहले दल-बदल कानून का फंस गया पेंच..
Tejpratap
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6 मिनट

Bihar MLC News : बिहार की राजनीति में छठ महापर्व के बाद एक बार फिर हलचल तेज होने वाली है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की आठ सीटों पर हुए चुनाव के बाद अब बिहार विधान परिषद में नए चेहरों की एंट्री की तैयारी शुरू हो गई है। चुनाव में जीत दर्ज करने वाले नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को शपथ दिलाने के लिए विधान परिषद सचिवालय ने प्रक्रिया तेज कर दी है। सबकुछ तय कार्यक्रम के मुताबिक हुआ तो 18 नवंबर को नए एमएलसी शपथ लेकर सदन की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। इसके साथ ही विधान परिषद की तस्वीर काफी हद तक बदल जाएगी।


दरअसल, मौजूदा विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त हो रहा है। ऐसे में नए सदस्यों के शपथ ग्रहण के लिए 18 नवंबर की तारीख संभावित मानी जा रही है। विधान परिषद सचिवालय ने शपथ ग्रहण का प्रस्ताव राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज दिया है। अब राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा हो सकती है।


इस बार शिक्षक और स्नातक कोटे की आठ सीटों पर हुए चुनाव में कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा है। खास बात यह है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चारों सीटों पर निवर्तमान विधान पार्षद चुनाव हार गए। यानी इन सीटों पर पुराने चेहरों की जगह पूरी तरह नए सदस्य दिखाई देंगे। करीब तीन दशक तक बिहार विधान परिषद में अपनी मौजूदगी बनाए रखने वाले भाजपा के दिग्गज नेता नवल किशोर यादव भी अब सदन में नजर नहीं आएंगे। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा को भी इस बार विधान परिषद से बाहर होना पड़ा है।


इसके अलावा तिरहुत शिक्षक सीट से सीपीआई के संजय सिंह और सारण शिक्षक सीट से जन सुराज पार्टी के अफाक अहमद को भी हार का सामना करना पड़ा। इनकी जगह अब अलग-अलग राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर सदन में पहुंचने का रास्ता साफ किया है।


शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर इस बार नए सदस्यों की एंट्री होगी। पटना शिक्षक सीट से राजद के संजीव कुमार ने जीत दर्ज की है। वहीं दरभंगा शिक्षक सीट से भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने बाजी मारी है। तिरहुत शिक्षक सीट से जन सुराज पार्टी के सुरेश प्रसाद राय और सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय राहुल राज चुनाव जीतकर आए हैं। इन चारों सदस्यों के शपथ लेने के बाद विधान परिषद में शिक्षक कोटे का प्रतिनिधित्व पूरी तरह नए चेहरों के हाथ में होगा। खासकर नवल किशोर यादव और मदन मोहन झा जैसे पुराने चेहरों की अनुपस्थिति सदन में चर्चा का विषय रहेगी।


स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर इस बार मुकाबला दिलचस्प रहा। कुछ पुराने नेताओं ने अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी, तो कुछ सीटों पर नए चेहरों ने जीत हासिल कर सबको चौंका दिया।पटना स्नातक सीट से जदयू के नीरज कुमार ने एक बार फिर जीत दर्ज की है। वहीं कोसी स्नातक सीट से भाजपा के एनके यादव ने अपनी सीट बचाने में सफलता हासिल की। तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने जीत दर्ज की है। जबकि दरभंगा स्नातक सीट से राजद के अनिल झा पहली बार विधान परिषद पहुंचेंगे। इस तरह स्नातक कोटे की सीटों पर तीन पुराने चेहरों की वापसी होगी, जबकि अनिल झा नए सदस्य के रूप में सदन में नजर आएंगे।


इस चुनाव के बाद सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय प्रत्याशी बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज को लेकर हो रही है। दोनों पर भाजपा की कथित सदस्यता लेने और पार्टी के समर्थन में गतिविधियां करने के आरोप लगे थे। इसे आधार बनाकर राजद और जन सुराज पार्टी ने विधान परिषद के कार्यकारी सभापति रामवचन राय को मांगपत्र सौंपा था। विपक्ष की मांग थी कि निर्दलीय रहते हुए किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेने के आधार पर दोनों की विधान पार्षदी समाप्त की जाए। हालांकि, इस मांग पर फिलहाल तकनीकी पेच फंस गया है।


विधान परिषद के सूत्रों के मुताबिक, दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई सदन के सदस्य बन चुके व्यक्ति पर ही की जा सकती है। राहुल राज ने अभी शपथ नहीं ली है, इसलिए तकनीकी रूप से वह फिलहाल विधान परिषद के सदस्य नहीं बने हैं। उनकी सीट पर 16 नवंबर तक अफाक अहमद ही सदस्य बने रहेंगे। वहीं बंशीधर ब्रजवासी का मौजूदा कार्यकाल भी 16 नवंबर को समाप्त हो रहा है। ऐसे में उनके खिलाफ मौजूदा सदस्यता के आधार पर होने वाली संभावित कार्रवाई का मामला भी कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रभावहीन हो सकता है। इस तकनीकी स्थिति के कारण विपक्ष की मांग पर तत्काल कार्रवाई नहीं हो सकी है।


कुल मिलाकर आठ सीटों के चुनाव ने बिहार विधान परिषद की राजनीतिक तस्वीर बदल दी है। शिक्षक कोटे की चारों सीटों पर नए चेहरे होंगे, जबकि स्नातक कोटे में पुराने नेताओं के साथ नए सदस्यों का भी प्रतिनिधित्व रहेगा।अब सभी की नजर राज्यपाल की मंजूरी और शपथ ग्रहण की तारीख पर टिकी है। अगर 18 नवंबर को शपथ ग्रहण होता है तो बिहार विधान परिषद में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत होगी। पुराने दिग्गजों की विदाई और नए सदस्यों की एंट्री के बीच यह देखना भी दिलचस्प होगा कि सदन के भीतर आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण किस करवट बैठते हैं।