ब्रेकिंग
विक्रमशिला सेतु की मरम्मत छठ तक टालने की मांग तेज, सांसद ने CM सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर की अपीलऐतिहासिक गांधी मैदान से विकास का संकल्प, 80वें स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 6 बड़े ऐलान15 अगस्त को शुरू हुई थी PIN Code की कहानी, जानिए छह अंकों में कैसे छिपी होती है आपके पते की पहचान और क्या है इसका इतिहास‘कहीं दोबारा आंदोलन न करना पड़े’, बाबा रामदेव ने शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार पर उठाए सवालजश्न-ए-आजादी के बीच दर्दनाक हादसा, नदी में गिरी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो; 5 लोगों की मौतविक्रमशिला सेतु की मरम्मत छठ तक टालने की मांग तेज, सांसद ने CM सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर की अपीलऐतिहासिक गांधी मैदान से विकास का संकल्प, 80वें स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 6 बड़े ऐलान15 अगस्त को शुरू हुई थी PIN Code की कहानी, जानिए छह अंकों में कैसे छिपी होती है आपके पते की पहचान और क्या है इसका इतिहास‘कहीं दोबारा आंदोलन न करना पड़े’, बाबा रामदेव ने शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार पर उठाए सवालजश्न-ए-आजादी के बीच दर्दनाक हादसा, नदी में गिरी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो; 5 लोगों की मौत

Bihar Legislative Council : बिहार विधान परिषद में स्वास्थ्य विभाग की बदहाली पर विपक्ष ने उठाया सवाल, कहा- आँख के इलाज के लिए जाता होता है दिल्ली, मंत्री का जवाब - आप खुद इलाज करवाने के लिए मुझसे करवाते हैं पैरवी

बिहार विधान परिषद में स्वास्थ्य विभाग पर बहस गर्म हुई। डॉक्टरों की कमी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेजों की स्थिति पर विपक्ष और मंत्री के बीच तीखी चर्चा रही।

Bihar Legislative Council : बिहार विधान परिषद में स्वास्थ्य विभाग की बदहाली पर विपक्ष ने उठाया सवाल, कहा- आँख के इलाज के लिए जाता होता है दिल्ली, मंत्री का जवाब - आप खुद इलाज करवाने के लिए मुझसे करवात
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar Legislative Council : बिहार विधान परिषद में आज स्वास्थ्य विभाग को लेकर चर्चा काफी गर्म रही। विपक्षी एमएलसी ने सदन में सवाल उठाया कि राज्य के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी है। उन्होंने कहा कि जितने पद नियुक्त हैं, उतने डॉक्टर असल में मौजूद नहीं हैं। इस पर स्वास्थ्य विभागीय मंत्री ने स्वीकार किया कि यह समस्या वास्तविक है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि बहाली होने के बावजूद कई डॉक्टर दो साल की नौकरी करने के बाद पद छोड़ देते हैं और फिर से रिक्त पद बन जाते हैं। मंत्री ने कहा, “समस्या बनी रहती है, लेकिन हम इसके लिए उपाय करने में लगे हुए हैं।”


इस दौरान राजद के एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने चुटकी लेते हुए पूछा कि आखिर डॉक्टर बिहार में क्यों नहीं रहना चाहते। इस पर मंत्री मंगल पांडे ने विपक्षी पर पलटवार करते हुए कहा कि, “आपके समय में एक भी मेडिकल कॉलेज नहीं खुला, जबकि हमारे समय में 15 मेडिकल कॉलेज खोले गए। पिछले 20 साल में हमने 15 मेडिकल कॉलेज खोले। जब मेडिकल कॉलेज ही नहीं था तो डॉक्टर कहाँ से आएंगे? अब मेडिकल कॉलेज खुल गया है, लेकिन आपको यह बात पसंद नहीं आ रही। हमारे गोतिया सुनील कुमार हमेशा सवाल उठाते रहते हैं।”


सुनील कुमार सिंह ने इसके जवाब में कहा कि वे मंत्री के ज्ञान के कायल हैं और उन्होंने कहा, “सर, आप मेरे बड़े भाई समान हैं। लेकिन देखिए, आप कह रहे हैं कि पहले मेडिकल कॉलेज नहीं थे, लेकिन उस समय भी छह मेडिकल कॉलेज थे। फिर भी राज्य के मुख्य सचेतक महोदय अपनी आंख का इलाज दिल्ली जाकर करवाते हैं। यह कहां की चिकित्सा सुविधा है, और लानत है ऐसे मेडिकल कॉलेजों पर।”


मंत्री मंगल पांडे ने इस पर जवाब दिया कि जब भी किसी माननीय सदस्य को आंख का इलाज करवाना होता है, वे पटना में ही करवाते हैं और हमारी ओर से पैरवी भी करवाई जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य सचेतक के दोस्त बाहर हैं, इसलिए उन्होंने बाहर जाकर इलाज करवाया। इसी बीच सभापति ने सदन में टिप्पणी की कि सचेतक जी के दोस्त वहां हैं, इसलिए उन्होंने बाहर इलाज करवाया।


इस चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की समस्या सिर्फ डॉक्टरों की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल कॉलेजों की उपलब्धता, डॉक्टरों की राज्य में स्थायित्व और सुविधा की गुणवत्ता भी बड़ी चुनौती है। मंत्री ने यह भी बताया कि नई मेडिकल कॉलेजों के खुलने के बाद डॉक्टरों की संख्या बढ़ी है, लेकिन फिर भी उन्हें स्थायी रूप से बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।


विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर लगातार केंद्रित सवाल उठाए और कहा कि डॉक्टरों की कमी और मेडिकल कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर राज्य सरकार को गंभीर कदम उठाने की जरूरत है। वहीं मंत्री ने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 20 साल में बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र में काफी विकास हुआ है और नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं।


सदन में यह बहस यह भी दिखाती है कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार के लिए न केवल डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना जरूरी है, बल्कि उन्हें राज्य में स्थायी रखने और चिकित्सा सुविधाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति बनाना भी अनिवार्य है। आज की इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की जरूरत है और इसे लेकर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच लगातार संवाद और बहस जारी रहेगी।