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कलंक कथा: भ्रष्ट DTO के घर में मिले थे 50 लाख कैश...पैसा को वैध साबित नहीं कर सके, BAS अफसर ने 78.97 लाख की अवैध संपत्ति बनाई, निगरानी ने भ्रष्टाचार की खोली थी पोल

मुजफ्फरपुर के तत्कालीन डीटीओ रजनीश लाल निगरानी छापेमारी में मिले 50 लाख रुपये कैश को वैध साबित नहीं कर सके। जांच में आय से अधिक संपत्ति के आरोप प्रमाणित होने के बाद सरकार ने उनके खिलाफ विभागीय दंड की कार्रवाई की है।

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फाइल तस्वीर
© Google
Viveka Nand
4 मिनट

Bihar Transport News: बिहार प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी व तत्कालीन डीटीओ के खिलाफ 2021 में भ्रष्टाचार का केस दर्ज हुआ था. विभागीय कार्यवाही में आरोप प्रमाणित हो गए। निगरानी  ब्यूरो की छापेमारी में अधिकारी के घऱ से मिले लगभग 50 लाख नकदी को आरोपी डीटीओ वैध साबित नहीं कर सके. लिहाजा जांच आयुक्त की रिपोर्ट को सही मानते हुए, सरकार ने आरोपी तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी को दंड देने का निर्णय लिया है. 

मुजफ्फरपुर डीटीओ के कई ठिकानों पर हुई थी छापेमारी 

मुजफ्फरपुर के तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी रजनीश लाल के ठिकानों पर निगरानी ब्यूरो ने छापेमारी की थी. आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में इनके खिलाफ 22 जून 2021 को निगरानी थाने में केस दर्ज किया था. निगरानी रेड के बाद बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी व मुजफ्फरपुर के डीटीओ रहे रजनीश लाल को 9 जुलाई 2021 के प्रभाव से निलंबित किया गया . परिवहन विभाग ने इनके खिलाफ 14 सितंबर 2021 को आरोप-पत्र गठित कर अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की थी. लंबे समय तक निलंबित रखने के बाद सरकार ने इन्हें 16 जनवरी 2024 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया. 

जांच अधिकारी की रिपोर्ट में आरोप प्रमाणित 

संचालन पदाधिकारी सह जांच आयुक्त ने डीटीओ रजनीश लाल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित बताया. आवास की तलाशी के क्रम में इनके घर से 40 लाख रुपए प्राप्त होने के संबंध में इनका कहना था कि एक फ्लैट की बिक्री के लिए एकरारनामा किया था. विभिन्न तिथि को अग्रिम राशि उपलब्ध कराई गई थी,कोरोना की वजह से वे उक्त राशि को बैंक में जमा नहीं करा पाये थे. रजनीश लाल ने सरकार को दिए जवाब में कहा था कि जांच आयुक्त द्वारा जांच प्रतिवेदन में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया है. 

सेल डीड रजिस्टर्ड नहीं...50 लाख नकदी को वैध साबित नहीं कर सके डीटीओ साहब 

संचालन पदाधिकारी की रिपोर्ट और आरोपी अधिकारी रजनीश लाल के जवाब की समीक्षा सामान्य प्रशासन विभाग के स्तर से की गई. जिसमें पाया गया की आरोपी अधिकारी के आवासीय मकान से जब्त की गई राशि के संबंध में इनके द्वारा प्रस्तुत सेल डीड एग्रीमेंट 'रजिस्टर्ड' नहीं था. यह मात्र नोटराइज्ड था. आरोपी अधिकारी ने इतना हैवी अमाउंट कैश में डील किया. इस संबंध में संतोषजनक उत्तर नहीं दिए. इनका बयान विरोधाभासी है. जांच प्रतिवेदन के अनुसार आरोपी अधिकारी द्वारा 41 लाख 90 हजार की बरामद अपने आवास में बताया गया, जबकि आवासीय मकान की तलाशी में 50 लाख 91 हजार ₹800 बरामद की गई थी. आरोपीय अधिकारी ने इसे चैलेंज नहीं किया है. उन्होंने 9 लाख 1800 रुपए अपनी मां के आवास से बरामद भी बताया है .

डीटीओ के खिलाफ अवैध संपत्ति अर्जित करने के आरोप प्रमाणित 

सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने पत्र में कहा है कि, सारे तथ्यों पर विचार किया गया. जांच पदाधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है कि आरोपी अधिकारी ने अपने पद का फर्जी दुरुपयोग कर वैध आय से 78 लाख 97,589 रुपया अधिक संपत्ति अर्जित की है. जांच पदाधिकारी ने इसे स्थापित किया है. रिपोर्ट में डीटीओ रजनीश लाल के खिलाफ लगे आरोप प्रमाणित प्रतिवेदन किया गया है .

एडीएम (लोक शिकायत) के पद पर पदस्थापित हैं रजनीश लाल 

इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने मुजफ्फरपुर के तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी रजनीश लाल के खिलाफ आरोप वर्ष 2020-21 के लिए निंदन और दो वेतन वृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड अधिरोपित किया है. बता दें, रजनीश लाल वर्तमान में सीतामढ़ी में एडीएम (लोक शिकायत) के पद पर पदस्थापित हैं. 

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Viveka Nand

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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