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BIHAR News: बिहार में ट्रैफिक पुलिस की पोस्टिंग के लिए बने नए नियम, जानिए कौन होगा बाहर

बिहार में ट्रैफिक व्यवस्था को हाईटेक और जवाबदेह बनाने की तैयारी! सरकार ने यातायात थानों में तैनाती के लिए नई चयन प्रक्रिया लागू कर दी है। अब सेवा रिकॉर्ड, आयु सीमा और तकनीकी दक्षता के आधार पर होगा चयन। जानिए क्या हैं नए नियम।

Bihar police
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© Ai photo
Tejpratap
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Bihar police: बिहार सरकार ने राज्य की यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी, तकनीक-सक्षम और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने यातायात थानों में पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों की तैनाती के लिए नई मानक अर्हताएं और चयन प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना, यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं में कमी लाना है।


राज्य में वर्तमान में 53 यातायात थाने संचालित हैं, जिनके लिए कुल 2750 पद सृजित किए गए हैं। इसके अलावा सरकार 28 नए यातायात थानों की स्थापना की तैयारी कर रही है। इन नए थानों के लिए 4215 अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। इससे आने वाले समय में राज्य की ट्रैफिक व्यवस्था और अधिक संगठित एवं प्रभावी बनने की उम्मीद है।


नई नीति के तहत यातायात थानों में तैनात होने वाले पुलिसकर्मियों के लिए आयु सीमा भी निर्धारित कर दी गई है। पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) के लिए अधिकतम आयु 50 वर्ष तय की गई है। वहीं पुलिस अवर निरीक्षक (एसआई) के लिए यह सीमा 40 वर्ष रखी गई है। सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) और हवलदारों के लिए अधिकतम आयु 55 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि सिपाही और चालक सिपाही के लिए अधिकतम आयु 35 वर्ष होगी।


सरकार ने स्पष्ट किया है कि यातायात थानों में तैनाती केवल योग्य और दक्ष कर्मियों की ही की जाएगी। इसके लिए संबंधित कर्मी का सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह स्वच्छ होना अनिवार्य होगा। साथ ही पिछले तीन वर्षों का वार्षिक गोपनीय चरित्र अभिलेख (एसीआर) ‘अच्छा’ या उससे बेहतर श्रेणी का होना चाहिए। जिन कर्मियों को यातायात नियमों की बेहतर जानकारी होगी, कंप्यूटर टाइपिंग में दक्षता होगी तथा यातायात प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त होगा, उन्हें चयन में प्राथमिकता दी जाएगी।


नई व्यवस्था के अनुसार चयनित पुलिसकर्मियों का कार्यकाल न्यूनतम तीन वर्षों का होगा। हालांकि किसी भी जिले में उनकी तैनाती तीन वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाई जाएगी। सरकार का मानना है कि निश्चित कार्यकाल से ट्रैफिक प्रबंधन में स्थिरता आएगी और कर्मियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।


महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी पुलिसकर्मी की तैनाती उसके गृह जिले में नहीं की जाएगी। इससे निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा यातायात बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक-तिहाई पदों पर महिला कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का भी प्रावधान किया गया है।


चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए तीन पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) की समिति गठित की जाएगी। यही समिति योग्य उम्मीदवारों का मूल्यांकन कर चयन प्रक्रिया की निगरानी करेगी। नियमों के अनुसार योग्य अभ्यर्थियों की सूची से कम से कम 70 प्रतिशत रिक्त पदों को भरा जाएगा। इसके साथ ही 15 प्रतिशत की प्रतीक्षा सूची भी तैयार की जाएगी, जिसकी वैधता एक वर्ष तक रहेगी।


यदि चयन प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार की शिकायत सामने आती है तो उसका निपटारा क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अथवा पुलिस उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर पर किया जाएगा। सरकार ने प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल तक चयन प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।


सरकार का मानना है कि नई चयन नीति लागू होने के बाद बिहार की यातायात व्यवस्था अधिक पेशेवर, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनेगी। इससे सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, दुर्घटनाओं पर नियंत्रण होगा और आम लोगों को बेहतर यातायात सुविधाएं मिल सकेंगी।