Bihar Tender Scam : बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में अब बड़ा विस्फोट होने की आहट सुनाई दे रही है। भ्रष्टाचार के इस हाईप्रोफाइल मामले में गिरफ्तार ठेकेदार रिशुश्री ने विशेष निगरानी इकाई (SVU) की पूछताछ में कई ऐसे राज उगल दिए हैं, जिससे कई बड़े अफसरों और नौकरशाहों की नींद उड़ गई है। सूत्रों की मानें तो अब जांच एजेंसी की नजर उन बड़े चेहरों पर है, जिनके संरक्षण में करोड़ों रुपये के टेंडरों का खेल खेला गया।
एसवीयू ने पहले ही इस मामले में मुमुक्षु कुमार चौधरी, कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह और सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता तारिणी दास को गिरफ्तार कर लिया है। अब इन सभी से रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की तैयारी शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसी सवालों की लंबी सूची तैयार कर रही है, जिससे टेंडर घोटाले के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस घोटाले में चर्चित आईएएस अधिकारी संजीव हंस पर भी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। संजीव हंस इस मामले में नामजद आरोपी हैं और एसवीयू उनकी तलाश में कई बार उनके ठिकानों पर दबिश दे चुकी है। जांच एजेंसी उन्हें फरार मान रही है, जबकि उनके वकील का कहना है कि वह दिल्ली में अपने पिता के इलाज में व्यस्त हैं।
इधर, इस कांड में आरोपी बनाए गए दो अन्य आईएएस अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर को राज्य सरकार पहले ही निलंबित कर चुकी है। एसवीयू ने इनके ठिकानों पर भी छापेमारी की है। अब संभावना जताई जा रही है कि जांच एजेंसी जल्द ही तीनों आईएएस अधिकारियों को पूछताछ के लिए कानूनी नोटिस भेज सकती है। यदि नोटिस के बावजूद वे उपस्थित नहीं होते हैं तो गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, रिमांड के दौरान रिशुश्री से करीब 30 घंटे से अधिक समय तक लगातार पूछताछ की गई। इस दौरान एसवीयू अधिकारियों ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच रिपोर्ट के आधार पर कई अहम सवाल पूछे। पूछताछ में रिशुश्री ने कुछ आरोपों को नकारा, जबकि कई तथ्यों को स्वीकार भी किया। इन्हीं बयानों के आधार पर जांच एजेंसी अब अगले चरण की कार्रवाई की तैयारी में जुटी हुई है।
जांच एजेंसी अब रिशुश्री के सहयोगी संतोष कुमार, मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह को आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ कर सकती है। माना जा रहा है कि इस दौरान कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं और करोड़ों के टेंडर घोटाले की परतें खुल सकती हैं।
इस मामले में अब तक रिशुश्री, उसका सहयोगी संतोष कुमार और तीन सरकारी अधिकारियों समेत कुल पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं, रिशुश्री के करीबी सहयोगी पवन कुमार के ठिकानों पर भी एसवीयू की छापेमारी हो चुकी है। जांच एजेंसी लगातार इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। बिहार के सबसे चर्चित टेंडर घोटाले में अब जांच की सुई सीधे बड़े अफसरों तक पहुंचती दिख रही है। आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे और नई गिरफ्तारियां इस मामले को और भी सनसनीखेज बना सकती हैं





