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Bank Exam Scam : आखिर हर बार बिहार ही क्यों बन रहा है ‘मुन्नाभाइयों’ का अड्डा? NEET के बाद बैंक परीक्षा में भी सेटिंग गैंग का खुलासा, सिस्टम पर बड़े सवाल

Bank Exam Scam : NEET के बाद अब बिहार में बैंक परीक्षा सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ है। आखिर क्यों हर पेपर लीक और परीक्षा माफिया का तार बिहार से जुड़ता है?

Bank Exam Scam : आखिर हर बार बिहार ही क्यों बन रहा है ‘मुन्नाभाइयों’ का अड्डा? NEET के बाद बैंक परीक्षा में भी सेटिंग गैंग का खुलासा, सिस्टम पर बड़े सवाल
Tejpratap
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Bank Exam Scam : नीट परीक्षा में सॉल्वर गैंग और फर्जी परीक्षार्थियों के खुलासे की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि अब बैंकिंग परीक्षाओं में नौकरी दिलाने का खेल सामने आ गया है। राजधानी पटना से जिस तरह एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है, उसने एक बार फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर हर बड़े परीक्षा घोटाले, पेपर लीक और सॉल्वर गैंग का तार बिहार से ही क्यों जुड़ जाता है?


क्या बिहार देश का सबसे बड़ा टैलेंट हब है या फिर धीरे-धीरे यह परीक्षा माफियाओं की प्रयोगशाला बनता जा रहा है? क्यों हर बार किसी न किसी प्रतियोगी परीक्षा में बिहार का नाम सामने आता है? आखिर कौन हैं वे लोग जो युवाओं के भविष्य का सौदा कर रहे हैं?


पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बैंक की नौकरियों में सेटिंग कराने का दावा करता था। पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से विभिन्न बैंकों के हस्ताक्षरयुक्त ब्लैंक चेक, मार्कशीट, एडमिट कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि अभ्यर्थियों से पहले ही चेक ले लिए जाते थे ताकि नौकरी लगने के बाद रकम वसूलने में कोई परेशानी न हो। कई चेकों पर सात-सात लाख रुपये तक की राशि लिखी मिली है।


दानापुर एएसपी शिवम धाकड़ के मुताबिक सूचना मिली थी कि यहां नीट और बैंक परीक्षाओं को लेकर सेटिंग की जा रही है। छापेमारी के दौरान प्रवीण शंकर उर्फ गोलू कुमार को पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर चार अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई। लेकिन असली सवाल गिरफ्तारी नहीं है। असली सवाल यह है कि आखिर ये गिरोह इतने लंबे समय तक चलता कैसे रहा? क्या बिना किसी बड़े नेटवर्क के यह संभव है? क्या केवल पांच लोग इतने बड़े खेल को अंजाम दे सकते हैं? क्या इनके तार दूसरे राज्यों तक फैले हैं? क्या परीक्षा केंद्रों, कोचिंग नेटवर्क और दलालों की पूरी चेन काम कर रही है?


नीट परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थियों की गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में बिहार चर्चा में आया था। अब बैंकिंग परीक्षा में भी इसी तरह के गिरोह का खुलासा यह संकेत देता है कि समस्या केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। हर बार एक पैटर्न सामने आता है। पहले पेपर लीक, फिर सॉल्वर गैंग, फिर दलाल, फिर लाखों रुपये की डील और आखिर में कुछ गिरफ्तारियां। लेकिन क्या कभी उस पूरे नेटवर्क तक पुलिस पहुंच पाती है जो इन धंधों को चलाता है?


बिहार के लाखों युवा दिन-रात मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। गांवों से लेकर शहरों तक छात्र वर्षों तक कोचिंग करते हैं। ऐसे में जब कोई सॉल्वर गैंग पैसे लेकर नौकरी दिलाने का दावा करता है तो यह केवल अपराध नहीं बल्कि मेहनत करने वाले युवाओं के सपनों की हत्या है।


सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर युवाओं में ऐसे गिरोहों पर भरोसा क्यों बढ़ रहा है? क्या बेरोजगारी, लंबी भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली पर घटता भरोसा इसके पीछे की वजह है? जब वर्षों तक भर्तियां अटकती हैं तो क्या माफिया उसी निराशा का फायदा उठाते हैं? पटना में सामने आया यह मामला सिर्फ पांच लोगों की गिरफ्तारी नहीं है। यह उस बीमारी का लक्षण है जो वर्षों से परीक्षा व्यवस्था को खोखला कर रही है।


अब जरूरत केवल एफआईआर और गिरफ्तारी की नहीं है। जरूरत है यह पता लगाने की कि आखिर बिहार बार-बार परीक्षा माफियाओं की सुर्खियों में क्यों आ रहा है? क्यों हर बड़े पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और सेटिंग रैकेट का कोई न कोई सिरा बिहार से जुड़ जाता है? जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलेंगे, तब तक हर नई परीक्षा के साथ एक नया घोटाला और हर भर्ती के साथ एक नया सॉल्वर गैंग सामने आता रहेगा।