Bihar News : बिहार में सरकारी कर्मचारियों और सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारकों की मार्च महीने की सैलरी और पेंशन भुगतान में देरी को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य के वित्त विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जहां एक ओर अधिकांश कर्मचारियों को वेतन मिल चुका है, वहीं अभी भी करीब 10 प्रतिशत सरकारी कर्मियों को मार्च महीने का वेतन नहीं मिल पाया है। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत आने वाले एक करोड़ से अधिक लाभार्थियों को भी मार्च 2026 की पेंशन राशि का इंतजार है।
वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार शाम तक लगभग 80 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों के वेतन का भुगतान सफलतापूर्वक कर दिया गया था। शेष बचे कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे भी पूरा कर लिया जाएगा। विभागीय स्तर पर दावा किया गया है कि किसी भी प्रकार की गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति नहीं है, बल्कि तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कुछ भुगतान लंबित रह गए हैं।
वेतन भुगतान में देरी को लेकर वित्त विभाग के सूत्रों ने बताया कि राज्य के विभिन्न विभागों से जुड़े विकास कार्यों और बड़े वित्तीय लेन-देन की जांच प्रक्रिया के चलते भुगतान में समय लग रहा है। सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी बड़े वित्तीय दावों की गहन जांच के बाद ही भुगतान जारी किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी से बचा जा सके। इसी प्रक्रिया के कारण कुछ विभागों में वेतन वितरण की गति प्रभावित हुई है।
दूसरी ओर, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत आने वाले बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और दिव्यांग लाभार्थियों को भी मार्च महीने की पेंशन अभी तक नहीं मिल पाई है। यह योजना राज्य के लगभग 1.15 करोड़ से अधिक लोगों को मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करती है, जो सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है। लेकिन इस बार भुगतान में देरी के कारण लाभार्थियों में असंतोष देखा जा रहा है।
समाज कल्याण विभाग के सामाजिक सुरक्षा निदेशालय के अनुसार, पेंशन भुगतान में देरी अस्थायी है और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पहले ही पूरी कर ली गई हैं। विभाग ने जानकारी दी है कि बजट आवंटन के अनुसार राशि की निकासी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और अगले दो से तीन दिनों के भीतर सभी लाभार्थियों के खातों में पेंशन राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।
इस बीच राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य का खजाना खाली हो चुका है, जिसके कारण कर्मचारियों को वेतन और पेंशनधारकों को उनकी राशि समय पर नहीं मिल पा रही है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने हाल ही में बयान दिया था कि सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है और यही वजह है कि न तो कर्मचारियों को वेतन मिल रहा है और न ही पेंशनधारकों को भुगतान हो पा रहा है।
तेजस्वी यादव ने यह भी दावा किया था कि केवल आम कर्मचारी ही नहीं, बल्कि मंत्री, विधायक और यहां तक कि नेता प्रतिपक्ष तक की सैलरी भी लंबित है। उनके इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया।
हालांकि, इन सभी आरोपों को राज्य के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं और खजाना खाली होने की बात पूरी तरह गलत है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सभी मंत्रियों, विधायकों और नेता प्रतिपक्ष सहित संबंधित सभी जनप्रतिनिधियों को मार्च महीने का वेतन पहले ही जारी किया जा चुका है।






