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राजस्व सेवा संवर्ग का उपमुख्यमंत्री पर हमला, नियम संशोधन और भूमि सर्वे पर उठाए सवाल

बिहार राजस्व सेवा संवर्ग ने उपमुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए नियम संशोधन, भूमि सर्वे में देरी और लंबित मामलों पर जवाब मांगा।

बिहार न्यूज
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
6 मिनट

PATNA: बिहार राजस्व सेवा संवर्ग से संबद्ध बिरसा और बिरसा यूनाइटेड संयुक्त संघर्ष मोर्चा के द्वारा उपमुख्यमंत्री सह मंत्री राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मुंगेर में दिए गए आज के वक्तव्य पर आज की कार्य कारिणी में विचार-विमर्श किया गया और पारदर्शिता एवं जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए कुछ बिंदुओं पर जवाब देने की आवश्यकता महसूस की। 


पहली बात यह है कि उपमुख्यमंत्री का आज का यह दावा तथ्य से परे है कि मुख्यमंत्री सचिवालय के दबाव में राजस्व सेवा संवर्ग नियमावली में अचानक संशोधन किया गया तथा विभाग या माननीय मंत्री के आप्त सचिव की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। याद दिलाना चाहेंगे कि आपने 5 फरवरी 2026 को हमारे संघ के पदाधिकारियों के साथ हुई वार्ता में अपने स्तर से हुई भूल को स्वीकार किया था कि राजस्व विभाग में प्रोन्नति के पद बढ़ाए जाने से संबंधित संचिका होने की जानकारी देकर भूमि सुधार उपसमाहर्ता का पद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग में देने की संचिका पर धोखे से हस्ताक्षर करा लिया गया साथ ही यह भी कहा था कि इस गलती को 12 फरवरी 2026 तक सुधारकर लिखित रूप दे दिया जाएगा। 


 उल्लेखनीय है कि बिहार राजस्व सेवा संवर्ग माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के दिमाग की ही उपज है। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में हीं भूमि सुधारों एवं राजस्व प्रशासन के बेहतर संचालन के लिए बंदोपाध्याय कमेटी का गठन किया था और उसकी अनुशंसाओं के आलोक में 2010 में बिहार राजस्व सेवा संवर्ग का गठन किया गया था लेकिन साजिश के तहत बिहार राजस्व सेवा के सभी संवर्गीय, प्रोन्नत एवं अनुभवी अधिकारियों को साइड लाइन करके दूसरी सेवा के एकदम नए, अनुभवहीन और  नौसिखुए को आगे कर दिया गया. बिहार सरकार के अन्य किसी भी विभाग में इस प्रकार की अराजकता, असंवेदनशीलता एवं षड्यंत्र का माहौल नहीं है। इस प्रकार आपके कार्यकाल में राजस्व विभाग ने कैडर निर्माण की माननीय मुख्यमंत्री की मूल भावनाओं को ही कूड़ेदान में डालने का काम किया है। 


आपके कार्यकाल में राजस्व विभाग में हमारे सेवा संवर्ग से औपचारिक संवाद बंद होने और दूसरे सेवा संवर्ग के हावी होने की वजह से इस प्रकार की गड़बड़ियां हो रही हैं जबकि अन्य सभी विभागों में संबंधित विभाग के मूल कैडर के अधिकारी ही उसकी जान होते हैं, उनकी आवाज़ सबसे मुखर और उनका योगदान सबसे महत्वपूर्ण होता है। मुंगेर में आयोजित आज के जन संवाद में माननीय उपमुख्यमंत्री महोदय ने बिहार में पूर्व में हुए नरसंहारों का जिक्र करते हुए भूमि विवादों को बिहार के लिए कलंक बताया और इसके लिए सर्वे महा अभियान शुरू करने की जरूरत बताई है। इस संबंध में संयुक्त मोर्चा आपको बताना चाहता है कि मुंगेर जिला में यह महा-अभियान वर्ष 2020 में शुरू हुआ था। 


सर्वेक्षण के टाइम टेबल के अनुसार जिले के 5 अंचलों के 306 राजस्व ग्रामों में यह कार्य 525 दिनों अर्थात वर्ष 2022 तक ही पूर्ण होना था लेकिन आज तक एक भी मौजा का न तो अंतिम प्रकाशन हुआ है न ही उनमें से आज तक एक मौजा में भी नए नक्शा एवं सर्वे खतियान के अनुसार कामकाज ही शुरू हो पाया है। अगस्त 2024 में शुरू हुए दूसरे चरण के 4 अंचलों के 470 मौजा में संशोधित समय सारणी के अनुसार 180 दिन स्वघोषणा के लिए एवं 90 दिन किस्तवार (बड़े मौजों के लिए अधिकतम) कुल 270 दिन में किस्तवार हो जाना चाहिए था परंतु लगभग 600 दिन व्यतीत हो जाने के बावजूद एक भी मौजा में किस्तवार कार्य नहीं हुआ है. इसे माननीय उपमुख्यमंत्री महोदय किस रूप में लेते हैं। कार्य में शिथिलता, प्रशासनिक अकर्मण्यता, अक्षम्य लापरवाही या संपूर्ण अराजकता ? क्या भूमि सर्वेक्षण को पूरी तरह विफल करने के जिम्मेदार अधिकारियों (जो  brs के नहीं हैं) को चिन्हित करने एवं उनके ऊपर कानून सम्मत कार्रवाई करने की भी कोई कोशिश होगी ?


 महोदय, हमारा प्रदर्शन कमजोर नहीं है. अगर आप तुलना करें तो पाएंगे की भूमि सुधार उपसमाहर्ता के न्यायालय में म्यूटेशन अपील वाद, बीएलडीआर वादों की सुनवाई और निष्पादन का काम अंचल कार्यालय से कोसों दूर और काफी पीछे हैं। जिला भू-अर्जन समेत राजस्व के अन्य कार्यालयों की स्थिति भी अंचल कार्यालय से काफी खराब है। लेकिन अज्ञात कारणों से उन पर कभी चर्चा नहीं की जाती है। सिर्फ  राजस्व सेवा के अधिकारियों पर ही कारवाई एवं धमकी की तलवार लटकाइ जाती है. 


 उपमुख्यमंत्री महोदय द्वारा बार-बार परिमार्जन के 40 लाख आवेदनों के लंबित होने का प्रश्न उठाया जाता है लेकिन आज हम साफ़ तौर पर बताना चाहते हैं कि उसके लंबित रहने में हमारी कोई भूमिका नहीं है। राजस्व महाअभियान के दौरान इसके निष्पादन की तारीख 31 अक्टूबर तय की गई थी परंतु निर्वाचन 2025 निर्धारित होने के कारण राजस्व प्रशासन के सभी कर्मियों और पदाधिकारियों के चुनावी कार्यों में लगे होने की वज़ह से उस तारीख तक लक्ष्य पूरा करना संभव नहीं था। बाद में इस तारीख को 31 दिसंबर 2025 और फिर 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया। नई सरकार के गठन होने के साथ ही कृषि गणना, फार्मर रजिस्ट्रेशन और मापी महा-अभियान एक साथ शुरू कर दिया गया जबकि हमारे संसाधन सीमित थे। 


महोदय आपके द्वारा उदाहरण देकर कहा जा रहा है की पंजी-2 के साथ पाप करने वालों का श्मशान तक पीछा करूंगा.  इसका स्वागत है, हम भी चाहते हैं, य़ह हो। हम तो इस सेवा में 2010 के बाद आए हैं,  उनकी भी कुंडली खंगालिए जो वर्ष 2010 तक पंजी-2 पर स्याही डालते रहे हैं और आज की तारीख में विभाग में जमे होकर विभाग की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।

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