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बिहार में राशन कार्ड अभियान की रफ्तार पर ब्रेक, इस दस्तावेज के नहीं रहने पर हजारों आवेदन अटके

Bihar Ration Card: बिहार के विशेष राशन कार्ड अभियान में विवाहित महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र बड़ी बाधा बन गए हैं। मायके से प्रमाणपत्र जारी होने के नियम के कारण हजारों आवेदन लंबित हैं, जिससे पात्र परिवारों को समय पर राशन कार्ड नहीं मिल पा रहा है।

Bihar Ration Card
प्रतिकात्मक तस्वीर
© AI
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Ration Card: बिहार सरकार पात्र परिवारों तक राशन कार्ड पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चला रही है, लेकिन विवाहित महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया इस अभियान में बड़ी बाधा बन गई है। नियमों के अनुसार महिलाओं का जाति प्रमाणपत्र उनके मायके से जारी होता है, जबकि राशन कार्ड के लिए आवेदन ससुराल के पते से किया जा रहा है। इसी वजह से हजारों आवेदन लंबित पड़े हैं।



इस समस्या का सबसे अधिक असर गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ रहा है। कई महिलाओं को जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बार-बार अपने मायके के अंचल कार्यालय जाना पड़ रहा है। इससे यात्रा का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है और रोज कमाने वाले परिवारों की मजदूरी भी प्रभावित हो रही है। नतीजतन, सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में देरी हो रही है।



प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार आय और आवासीय प्रमाणपत्र स्थानीय स्तर पर आसानी से बन जाते हैं, लेकिन जाति प्रमाणपत्र के लिए विवाहित महिलाओं को अपने मायके के अंचल कार्यालय से ही दस्तावेज बनवाना पड़ता है। यदि मायका दूसरे जिले में है, तो प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है। यही कारण है कि सत्यापन पूरा होने के बावजूद बड़ी संख्या में आवेदन स्वीकृत नहीं हो पा रहे हैं।



इस समस्या का सबसे बड़ा असर सारण जिले में देखने को मिला है। जिले में 13 अगस्त तक 49,455 नए राशन कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन लोगों की भारी भागीदारी के चलते 2 अगस्त तक ही 57,549 आवेदन प्राप्त हो गए। इनमें से 52,007 आवेदनों का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 5,602 आवेदन अब भी लंबित हैं। अधिकारियों के मुताबिक इनमें करीब 5,000 आवेदन केवल विवाहित महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण अटके हुए हैं।



विशेष अभियान के दौरान 31 जुलाई को 6,211, 1 अगस्त को 2,318 और 2 अगस्त को 726 आवेदन प्राप्त हुए। आवेदन की संख्या लगातार बढ़ी, लेकिन आवश्यक दस्तावेज पूरे नहीं होने से कई फाइलों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।



अब जिला प्रशासन के सामने लंबित आवेदनों का शीघ्र निपटारा सबसे बड़ी चुनौती है। अधिकारियों को अधूरे दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना होगा, अन्यथा हजारों पात्र परिवार तय समय सीमा के भीतर राशन कार्ड से वंचित रह सकते हैं।



ग्रामीणों का कहना है कि विवाहित महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि सरकार या प्रशासन कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू करता है, तो हजारों परिवारों को राहत मिलेगी और राशन कार्ड अभियान भी अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकेगा।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता