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बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा ? इन चर्चाओं के बीच CM सम्राट ने BJP कोटे के सभी मंत्रियों को बुलाया, वजह क्या है...

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज शाम 5 बजे बीजेपी कोटे के सभी मंत्रियों की अहम बैठक बुलाई है। बैठक में सभी मंत्रियों की मौजूदगी अनिवार्य बताई गई है। जो मंत्री पटना या बिहार से बाहर हैं, उन्हें तत्काल पटना लौटने का निर्देश दिया गया है।

बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा ? इन चर्चाओं के बीच CM सम्राट ने BJP कोटे के सभी मंत्रियों को बुलाया, वजह क्या है...
Tejpratap
Tejpratap
7 मिनट

पटना: बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जेडीयू की ओर से फरक्का जलसंधि को लेकर दिए जा रहे तल्ख बयानों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भाजपा कोटे के सभी मंत्रियों की एक अहम बैठक बुलाई है। बैठक शुक्रवार शाम 5 बजे मुख्यमंत्री आवास पर होने की जानकारी सामने आ रही है। खास बात यह है कि भाजपा कोटे के सभी मंत्रियों को बैठक में हर हाल में मौजूद रहने को कहा गया है।


भाजपा सूत्रों के मुताबिक, जो मंत्री इस समय बिहार या पटना से बाहर हैं, उन्हें तत्काल पटना लौटने को कहा गया है। ऐसे में अचानक बुलाई गई इस बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि पार्टी स्तर पर बैठक की वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम को बताया जा रहा है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में बैठक के समय को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।


फरक्का जलसंधि पर JDU के तेवर ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से फरक्का जलसंधि को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज है। जेडीयू की ओर से इस मुद्दे पर जिस तरह का रुख सामने आया है, उसने एनडीए के भीतर इस विषय को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है।जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की ओर से साफ शब्दों में कहा जा चुका है कि फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर पार्टी कोई समझौता नहीं करेगी। इतना ही नहीं, बयान में यह तक कहा गया कि जरूरत पड़ी तो पार्टी सरकार में रहे या नहीं रहे, अपने रुख से पीछे नहीं हटेगी। जेडीयू के इस बयान को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि बिहार में भाजपा और जेडीयू की सरकार है। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण राज्य और केंद्र से जुड़े जल संसाधन के मुद्दे पर सहयोगी दल का इतना स्पष्ट और कड़ा रुख स्वाभाविक तौर पर राजनीतिक चर्चा को जन्म देता है। अब इसी बयान के करीब दो दिन बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से भाजपा कोटे के मंत्रियों की बैठक बुलाए जाने ने चर्चाओं को और हवा दे दी है।


क्या सिर्फ PM मोदी के कार्यक्रम की रणनीति के लिए है बैठक?

भाजपा सूत्रों की ओर से बैठक को लेकर जो वजह सामने आ रही है, उसके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पार्टी देशभर में एक महीने का बड़ा अभियान चलाने जा रही है।भारतीय जनता पार्टी ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक 'सेवा संकल्प अभियान' आयोजित करने का फैसला लिया है। इसी अभियान को बिहार में किस तरह और किस रणनीति के तहत चलाया जाएगा, इसे लेकर मुख्यमंत्री भाजपा कोटे के मंत्रियों के साथ चर्चा कर सकते हैं। बैठक में अभियान के कार्यक्रम, मंत्रियों की भूमिका, जिलों में गतिविधियां और सरकार तथा संगठन के स्तर पर कार्यक्रमों के समन्वय को लेकर चर्चा होने की संभावना है।यानी आधिकारिक तौर पर देखें तो बैठक का एजेंडा पूरी तरह संगठनात्मक और राजनीतिक कार्यक्रम से जुड़ा हुआ नजर आता है। लेकिन सवाल यह है कि फरक्का जलसंधि को लेकर जेडीयू के कड़े बयान के ठीक बाद भाजपा कोटे के सभी मंत्रियों को अचानक पटना बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी? यही सवाल इस बैठक को सामान्य राजनीतिक बैठक से अलग बना रहा है।


JDU के बयान के बाद BJP की अंदरूनी रणनीति पर नजर

बिहार की मौजूदा सत्ता व्यवस्था में भाजपा और जेडीयू दोनों महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के पास है और सरकार में दोनों दलों की भागीदारी है। ऐसे में किसी मुद्दे पर दोनों सहयोगी दलों के नेताओं के अलग-अलग तेवर सामने आने पर स्वाभाविक रूप से राजनीतिक विश्लेषकों की नजर सरकार की अंदरूनी स्थिति पर जाती है।फरक्का जलसंधि का मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है।  जेडीयू द्वारा इस मुद्दे पर स्पष्ट राजनीतिक रुख अपनाना और भाजपा की ओर से इस पर अलग रणनीति की संभावना, दोनों ही महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हालांकि अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक संकेत सामने नहीं आया है कि मुख्यमंत्री की बैठक का सीधा संबंध फरक्का जलसंधि विवाद से है। इसलिए इस बैठक को लेकर किसी राजनीतिक टकराव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।


 टाइमिंग ने बढ़ा दिए सवाल

राजनीति में कई बार किसी बैठक का एजेंडा जितना महत्वपूर्ण होता है, उससे ज्यादा उसकी टाइमिंग चर्चा में आ जाती है। यहां भी यही स्थिति दिखाई दे रही है। एक तरफ जेडीयू का फरक्का जलसंधि पर बेहद स्पष्ट और सख्त बयान सामने आता है। दूसरी तरफ उसके कुछ ही समय बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाजपा कोटे के सभी मंत्रियों की बैठक बुलाते हैं और बाहर मौजूद मंत्रियों को तत्काल पटना लौटने के निर्देश दिए जाते हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बैठक में सिर्फ 'सेवा संकल्प अभियान' की रणनीति पर चर्चा होगी या सरकार और एनडीए के भीतर चल रही राजनीतिक परिस्थितियों पर भी मंथन होगा? क्या मुख्यमंत्री भाजपा के मंत्रियों से फरक्का जलसंधि समेत हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर भी फीडबैक लेंगे?या फिर यह बैठक पूरी तरह प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम को लेकर है?इन सवालों के जवाब बैठक के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।


बिहार NDA में 'सब ठीक' है या कोई नई पटकथा?

फिलहाल भाजपा और जेडीयू दोनों के बीच किसी बड़े मतभेद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सरकार सामान्य रूप से काम कर रही है और दोनों दल एनडीए के घटक के तौर पर साथ हैं।लेकिन राजनीति में बयान बहुत कुछ संकेत देते हैं और फरक्का जलसंधि पर जेडीयू का हालिया रुख निश्चित तौर पर सामान्य बयान की श्रेणी में नहीं रखा जा रहा है।खास तौर पर जब जेडीयू की ओर से यह संदेश दिया गया हो कि इस मुद्दे पर पार्टी किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं करेगी।अब मुख्यमंत्री की बैठक ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है।क्या सम्राट चौधरी की बैठक सिर्फ 'सेवा संकल्प अभियान' की तैयारी है? या फरक्का जलसंधि पर JDU के रुख के बाद भाजपा ने भी अपनी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है?क्या एनडीए के भीतर इस मुद्दे पर कोई नई राजनीतिक पटकथा लिखी जा रही है? इन तमाम सवालों के जवाब अब शुक्रवार शाम होने वाली इस बैठक के बाद सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल इतना जरूर है कि बिहार की सियासत में फरक्का जलसंधि का मुद्दा अब सिर्फ जल संसाधन का विषय नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी तेजी से तलाशे जाने लगे हैं।