Bihar News: बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी कुमार मिथिलेश प्रसाद सिंह ने गजब का खेल किया. पटना सदर डीसीएलआर रहते इन पर गंभीर आरोप लगे थे. इन आरोपों में पटना के जिलाधिकारी ने 27 जून 2026 को आरोप पत्र गठित कर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को उपलब्ध कराया. जिलाधिकारी की रिपोर्ट के बाद राजस्व में भूमि सुधार विभाग ने 7 अगस्त 2026 को आरोपी अधिकारी कुमार मिथिलेश प्रसाद सिंह के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चलाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग से सिफारिश कर दी.
पटना सदर के तत्कालीन डीसीएलआर कुमार मिथिलेश प्रसाद सिंह पर पांच गंभीर आरोप हैं. आरोप है कि, इन्होंने अपनी ही गलत फैसले की एवज में अपनी द्वितीय पत्नी सुनीता सिंह के नाम पर बाजार मूल्य एक करोड़ 25 लाख रुपया से काफी कम मूल्य ₹25 लाख में चार कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री कराई है . इन्होंने शासकीय कार्यों और वित्तीय लेनदेन (डीड रजिस्ट्री) में पहचान छुपाने के उद्देश्य से अपने आधिकारिक नाम कुमार मिथिलेश प्रसाद सिंह की जगह पर उप नाम संजय कुमार सिंह का उपयोग किया है. इन्होंने पद का दुरुपयोग कर पटना सदर भूमि सुधार उप समाहर्ता रहते भू माफियाओं से मिलीभगत कर षड्यंत्र के तहत निजी लाभ कमाया है. केस सं- 66/ 2014-15 में बिना सभी पक्षों को नोटिस दिए और साक्ष्य को नजर अंदाज कर अमर पासवान के पक्ष में अवैध आदेश पारित किया है.
इनके खिलाफ पूर्व से ही पत्रकार नगर थाना में कांड संख्या 319/ 17 में केस दर्ज है. सरकारी भूमि के अवैध लगान निर्धारण में संलिप्त रहने के आरोप हैं. इस आरोप में आरोपी अधिकारी से 2 सितंबर 2026 को जवाब मांगा गया. इन्होंने जो जवाब दिया है उसमें सभी आरोपों का खंडन किया है. हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग आरोपी अधिकारी कुमार मिथिलेश प्रसाद सिंह के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद अनुशासनिक कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है. सामान्य प्रशासन विभाग ने मुख्य जांच आयुक्त बिहार को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया है.
बता दें, पटना सदर के तत्कालीन डीसीएलआर कुमार मिथिलेश प्रसाद सिंह वर्तमान में वरीय उप समाहर्ता बांका के पद पर पदस्थापित हैं.





