पटना: बिहार में लगातार सामने आ रहे परीक्षा और पेपर लीक की चुनौतियों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में टेक्नोलॉजी ने परीक्षा प्रणाली को आसान बनाने के साथ-साथ नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। यदि सिस्टम में शामिल एक व्यक्ति भी अपना ईमान बेच देता है तो प्रश्नपत्र बाजार में पहुंच जाता है और एक व्यक्ति की गलती से पूरी परीक्षा व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा सुधार बिहार सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसके लिए अलग से एक कमेटी बनाई जाएगी, जो परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के सुझाव देगी। उन्होंने कहा कि मैट्रिक और इंटर की परीक्षा से लेकर कॉलेज की परीक्षाएं, शिक्षकों की बहाली की परीक्षाएं और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को निष्पक्ष तरीके से कराना सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
‘एक आदमी ईमान बेच दे तो क्वेश्चन पेपर मार्केट में आ जाता है’
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षा में पेपर लीक की समस्या पर बेहद गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के कारण परीक्षा प्रणाली में जहां कई सुविधाएं आई हैं, वहीं जोखिम भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि “यदि एक आदमी ने अपना ईमान बेच दिया तो क्वेश्चन पेपर मार्केट में आ जाता है।” मुख्यमंत्री के मुताबिक, एक व्यक्ति की गलती से पूरी परीक्षा व्यवस्था इधर से उधर हो सकती है। इसलिए सरकार अब परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को लेकर अलग से विशेषज्ञ कमेटी बनाने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और दुनिया में टेक्नोलॉजी के माध्यम से जिस तरह परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, उसका भी अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए एक अलग कमेटी तैयार की जाएगी, जो आधुनिक परीक्षा प्रणाली और तकनीकी सुरक्षा के उपायों पर सुझाव देगी।
मैट्रिक-इंटर से शिक्षक भर्ती तक परीक्षा बड़ी चुनौती
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में हर साल बड़ी संख्या में परीक्षाएं आयोजित होती हैं। इनमें मैट्रिक और इंटर की बोर्ड परीक्षाओं के अलावा कॉलेज की परीक्षाएं, शिक्षक नियुक्ति परीक्षाएं और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी परीक्षाओं को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराना सरकार के लिए चुनौती है। परीक्षा में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी होने से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में तकनीक के साथ-साथ जवाबदेही और निगरानी को मजबूत करना जरूरी है।
15 अगस्त से बच्चों को मोबाइल ऐप पर मिलेगी मुफ्त पढ़ाई
मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि आज का दौर आईटी और एडवांस टेक्नोलॉजी का है। नई पीढ़ी के बच्चे मोबाइल पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में अगर बच्चों को बेहतर और क्वालिटी शिक्षा देनी है तो शिक्षा को भी मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना होगा।
सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि 15 अगस्त से मोबाइल ऐप के जरिए सरकारी स्कूलों के बच्चों को मुफ्त पढ़ाई उपलब्ध कराने की योजना शुरू की जाएगी। उन्होंने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष को इसे जल्द से जल्द शुरू करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस ऐप के लिए एक मॉनिटरिंग सेल बनाया जाए। इससे सरकार को यह जानकारी मिल सकेगी कि कितने बच्चे किस समय ऐप के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं और डिजिटल शिक्षा का कितना लाभ विद्यार्थियों को मिल रहा है।
बच्चों की पढ़ाई का तरीका बदला, सिस्टम को भी बदलना होगा
मुख्यमंत्री ने बदलती पीढ़ी के पढ़ाई के तरीके का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले अभिभावक बच्चों को सुबह चार बजे उठकर पढ़ाई करने की सलाह देते थे। उनका मानना था कि सुबह पढ़ने से चीजें ज्यादा याद रहती हैं। लेकिन आज की पीढ़ी का पढ़ने का तरीका बदल गया है। कई बच्चे रात 10 बजे से 12 बजे तक पढ़ना पसंद करते हैं और सुबह 7 से 8 बजे के बीच उठते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब पूरा सिस्टम और बच्चों की आदतें बदल रही हैं तो शिक्षा व्यवस्था को भी अपने अंदर बदलाव करना होगा।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बनेगी कमेटी
सम्राट चौधरी ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए भी एक कमेटी बनाने की घोषणा की। यह कमेटी इस बात पर सुझाव देगी कि बिहार जैसे राज्य में सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे उपलब्ध कराई जा सकती है।मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों के सुझावों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना है।
पेपर लीक पर मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब अलग कमेटी बनाकर परीक्षा प्रणाली में बदलाव की तैयारी को सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है।





