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Bihar News : घूसखोर दारोगा को बचाने के लिए पुलिस ने किया बड़ा खेल, अवैध शराब और बालू माफियाओं से जुड़ा है मामला

Bihar News : रंजय के मोबाइल की जांच में पाया गया कि उसने व्हाट्सएप काल की हिस्ट्री डिलीट कर दी थी। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किस नंबर से किस पुलिस पदाधिकारी से बातचीत हुई थी।

Bihar News
प्रतीकात्मक, घूसखोर दारोगा
© Meta, रिपोर्टर
Deepak Kumar
Deepak Kumar
5 मिनट

Bihar News : जमुई में बालू माफिया और दरोगा के बीच बातचीत का ऑडियो  वायरल होने के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गई थी। इस वायरल ऑडियो को फर्स्ट बिहार न्यूज ने प्रमुखता से प्रकाशित करने का कार्य किया था। जिसके बाद एसपी मदन कुमार आंनद के आदेश पर साइबर थाना की पुलिस को जांच कर कार्रवाई करने की बात कही गई थी। निष्पक्ष जांच करने के लिए जमुई साइबर डीएसपी राजन कुमार को सौंपा गया था।


आपको बताते चलें कि वायरल ऑडियो के आधार पर साइबर थाना में सभी अभियुक्त को बुलाया गया था और पूछताछ की गई थी। इस जांच के क्रम में ऑडियो वायरल करने वाले युवक जिसकी पहचान कल्याणपुर निवासी रंजय कुमार के रूप में की गई थी। उसे साइबर थाना में बुलाया गया और पूछताछ शुरू की गई थी. जिसमें रंजय ने साइबर जांच रिपोर्ट के अनुसार खुद स्वीकार किया था कि उसने एक वाट्सएप काल की क्लिप बनाई और एक बालू कारोबारी खैरा थाना क्षेत्र के कागेसर गांव निवासी दीपक चौधरी को दिया था।


साइबर जांच रिपोर्ट के अनुसार मामले का अनुसंधान कर रहे साइबर थाना के राजेश सोरेन को बताया कि जमुई थाना के चौकी प्रभारी मोती लाल साह के नाम पर बिहारी निवासी नीतीश कुमार से ट्रैक्टर छोड़ने के एवज में 20 हजार रुपए की मांग की गई थी। साथ ही साइबर थाना के FIR  रिपोर्ट के अनुसार खैरमा निवासी कृष्णा यादव से 50 हजार रुपये मांग की गई थी. जिसमें 30 हजार रुपए देने की बात कही थी। जबकि जो ऑडियो वायरल था उसमें रंजय कुमार जो जमुई के कचहरी चौक पर सत्तू बेचता है। वह टाउन थाना के SI मोती लाल शाह से बिहार निवासी गंगवा सिंह का ट्रैक्टर के एवज में बात चल रही थी. जिसमें डिमांड 50000 की गंगा से की गई थी और गंगा के द्वारा 30000 देने की बात कही जा रही थी, जो कि साफ़-साफ ऑडियो में सुना जा सकता है.


लेकिन पुलिस जांच और FIR में कृष्ण यादव का नाम लाया गया है, जो पुलिस के जांच पर सवालिया निशान खड़े करती है। रंजय ने यह भी बताया कि भूदेव ने शराब के बदले अक्षय किराना स्टोर को फोन पे से तीन हजार रुपये भेजे थे। वहीं पांच हजार रुपये बोधवन तालाब स्थित फ्रिज दुकानदार चंदन कुमार के स्टाफ को नगर थाना के सामने सब्जी बाजार के पास दिए गए थे। रंजय ने पुलिस के नाम पर बिहारी के गंगवा उर्फ कमल सिंह, कल्याणपुर के मुन्ना, बिहारी के चंदन यादव तथा दीपक चौधरी उर्फ भूदेव से हर महीने 10 हजार रुपये, शराब, दही आदि के लिए वसूले थें। यह रकम पुलिस पदाधिकारी तक भी पहुंचाई जाती थी।


इधर रंजय के मोबाइल की जांच में पाया गया कि उसने व्हाट्सएप काल की हिस्ट्री डिलीट कर दी थी। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किस नंबर से किस पुलिस पदाधिकारी से बातचीत हुई थी। आगे साइबर रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अवर निरीक्षक मोतीलाल साह को पक्ष रखने के लिए सूचना दी गई लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। फोन पर भी संपर्क की कोशिश की गई पर उन्होंने काल रिसीव नहीं किया। साइबर थाना के जांच रिपोर्ट में वीडियो वायरल करने वाले और वीडियो में आ रहें बालू माफिया को ही आपराधिक दर्जा दे दिया गया है. जो कहीं ना कहीं जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़ा कर रहा हैं। जब रंजय ने काल हिस्ट्री डिलीट कर दिया तो वीडियो में जिन बालू माफियाओं का नाम आया उनसे बिना पूछे अपराधी मानते हुए इस तरह की जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि पुलिस पदाधिकारी अपने पुलिस अधिकारी को बचा कर वीडियो वायरल करने वाले और वीडियो में जिसके नाम का जिक्र है, उन्हें ही दोषी मान रही है।


साइबर थाने की जांच रिपोर्ट 

बताते चलें कि जांच में यह भी सामने आया है कि रंजय ने पुलिस के नाम पर ठगी, भयादोहन, प्रतिरूपण, धौंस जमाकर अवैध बालू चलवाने और शराब के कारोबार को बढ़ावा देने का काम किया। इस आपराधिक षड्यंत्र में उसके साथ गंगवा उर्फ कमल कुमार सिंह, मुन्ना, चंदन यादव, दीपक चौधरी उर्फ भूदेव और चंदन कुमार भी शामिल थे। पुलिस ने सभी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। यहां बता दें कि कुछ दिन पूर्व जमुई के चौकी प्रभारी मोती लाल और बालू माफिया के बीच पैसे के लेन देन की बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

Dhiraj Kumar Singh

FirstBihar संवाददाता