Bihar News: बिहार के एक जिलाधिकारी से भिड़ना अपर समाहर्ता ( ADM) को महंगा पड़ा. सरकार ने पहले उन्हें निलंबित किया, अब विभागीय कार्यवाही चलाकर दंड भी दिया है .
यह मामला अरवल के तत्कालीन जिलाधिकारी और तत्कालीन अपर समाहर्ता सह बंदोबस्त पदाधिकारी से जुड़ा है. तत्कालीन अपर समाहर्ता संजय कुमार वर्तमान में नगर एवं आवास विभाग में संयुक्त सचिव हैं. इनके खिलाफ जिलाधिकारी ने 16 जनवरी 2024 को आरोप पत्र गठित कर सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा था. इसके बाद इन्हें 23 जनवरी 2024 को सस्पेंड किया गया.
संजय कुमार पर जिलाधिकारी अरवल के साथ अशिष्ट व्यवहार करने, जिलाधिकारी की छवि धूमिल करने, उनके आदेशों का अनुपालन नहीं करने,अधीनस्थ कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने, मौखिक उत्पीड़न करने जैसे आरोप थे. इन आरोपों में इनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही संचालित की गई थी. गयाजी के प्रमंडलीय आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था. संचालन पदाधिकारी ने जो जांच रिपोर्ट दिया, उसमें 11 आरोपों को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है.
एडीएम संजय कुमार के खिलाफ आरोप प्रमाणित पाए जाने पर सामान्य प्रशासन विभाग ने इनसे लिखित अभिकथन की मांग की. जिसमें इन्होंने कहा कि अरवल के जिलाधिकारी ने पद का दुरुपयोग एवं भय दिखाकर मेरे खिलाफ झूठे एवं बेबुनियाद आरोप लगाए हैं. जिलाधिकारी जिला का सर्वोच्च पद होता है.इस कारण भय से कुछ अधिकारियों ने उन पर बिना साक्ष्य के ही आरोप लगाए हैं. मेरे खिलाफ वित्तीय अनियमितता या सरकारी राजस्व की हानि के आरोप नहीं हैं.
हालांकि संचालन पदाधिकारी में अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है कि सभी गवाहों द्वारा एडीएम संजय कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही बताया गया है. साथ ही विशेष कार्य पदाधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह के साथ बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग है. जिसमें ये स्वयं को काफी प्रभावशाली एवं पॉलिटिकल मजबूत व्यक्ति बता रहे हैं. ऐसे शब्द बोले गए हैं जो वरीय पदाधिकारी के आचरण के अनुरूप नहीं हैं.
संचासन पदाधिकारी की रिपोर्ट और तत्कालीन एडीएम के जवाब की समीक्षा की गई. इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने अरवल जिले के तत्कालीन एडीएम संजय कुमार के खिलाफ आरोप वर्ष के लिए निंदन और एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड लगाया है.


