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Bihar News: बिहार में 3 नए बराज के निर्माण को मिली मंजूरी, DPR तैयार करने में जुटा विभाग

Bihar News: बिहार में इन नदियों पर तीन नए बराज बनेंगे। केंद्रीय जल आयोग ने पीएफआर को मंजूरी दी, विभाग DPR तैयार करने में जुटा। बाढ़ प्रबंधन, सिंचाई और पेयजल के मामले में होगा लाभ..

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार में बाढ़ की मार से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग बड़ा कदम उठाने की ओर अग्रसर है। केंद्रीय जल आयोग की स्क्रीनिंग कमेटी ने बागमती नदी पर दो और महानंदा नदी पर एक बराज बनाने की प्रारंभिक संभाव्यता रिपोर्ट को हरी झंडी दे दी है। दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में ढेंग (बागमती), कटौंझा (बागमती) और तैयबपुर (महानंदा) साइट्स पर बराज निर्माण को मंजूरी मिली है। विभाग अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है ताकि काम जल्द शुरू हो सके। इससे राज्य में कुल बराजों की संख्या 6 हो जाएगी।


वर्तमान में कोसी और सोन नदियों पर बराज मौजूद हैं, लेकिन उत्तरी बिहार की बागमती और महानंदा जैसी नदियां बाढ़ का सबब बनती रहती हैं। नए बराजों से नेपाल सीमा से आने वाले पानी को नियंत्रित किया जाएगा। बागमती पर ढेंग (सीतामढ़ी) और कटौंझा (मुजफ्फरपुर) में बराज बनने से हजारों हेक्टेयर जमीन बचेगी, जबकि महानंदा पर तैयबपुर (किशनगंज) बराज सीमांचल के इलाकों को सुरक्षित करेगा। विभाग का अनुमान है कि ये परियोजनाएं लाखों लोगों को बाढ़ से बचाएंगी और सिंचाई-पीने के पानी की आपूर्ति में क्रांति लाएंगी।


बिहार सरकार की यह पहल केंद्र के सहयोग से तेज हो रही है। जल मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि DPR पूरा होते ही केंद्र से फंडिंग की मांग की जाएगी। इसके अलावा कोसी पर डागमारा, गंडक पर अरेराज, सकरी पर बकसोती, मसान-अवसाने पर बराज, कमला नहर उन्नयन, सोन के इंद्रपुरी बराज का अपग्रेड और नाटा वीयर को बराज में बदलने की योजना भी पटरी पर है। ये सभी परियोजनाएं उत्तरी बिहार के चार प्रमुख नदियों पर दूसरा बराज सुनिश्चित करेंगी।


ये बराज न सिर्फ बाढ़ रोकेंगे बल्कि सूखे इलाकों में पानी पहुंचाकर खेती को हरा-भरा बनाएंगे। सीमांचल और तिरहुत प्रमंडल के किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जहां बाढ़ हर साल फसलें बर्बाद कर देती है। विभाग ने जल्द DPR फाइनलाइज करने का लक्ष्य रखा है ताकि 2026 तक निर्माण शुरू हो सके। आने वाले दिनों में बिहार के लिए यह कदम आर्थिक और सामाजिक विकास का नया द्वार खोलेगा।