Bihar Monsoon Session 2026 : बिहार विधानसभा का मानसून सत्र इस बार काफी हंगामेदार रहने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, राज्य विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई 2026 के बीच आयोजित किया जा सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिनों में सत्र की तारीखों का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, मानसून सत्र के पहले दिन सरकार अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) सदन के पटल पर रख सकती है। इसके अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी पेश किए जाने की संभावना है। सत्र के दौरान प्रश्नकाल, शून्यकाल और विभिन्न सरकारी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा होगी। सरकार अपनी उपलब्धियों, विकास परियोजनाओं और नई योजनाओं को सदन में प्रस्तुत करने की तैयारी में है।
दूसरी ओर, विपक्ष ने भी सरकार को घेरने के लिए पूरी रणनीति तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि इस बार सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और जोरदार नोकझोंक देखने को मिल सकती है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सरकार के खिलाफ कई अहम मुद्दे उठाएंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सत्ता पक्ष का पक्ष मजबूती से रखते नजर आ सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भरत तिवारी एनकाउंटर के मुद्दे को प्रमुखता से सदन में उठाएगा। विपक्ष इस मामले में सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। हाल के दिनों में इस एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज रही है और अब इसके विधानसभा में भी गूंजने के आसार हैं।
इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली कराने का मामला और चर्चित 10 सर्कुलर रोड बंगला विवाद भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई कर रही है, जबकि सरकार नियमों के तहत कार्रवाई होने की बात कह रही है। ऐसे में इस मुद्दे पर भी सदन के भीतर तीखी बहस हो सकती है।
मानसून सत्र में हाल ही में चर्चा में आए रिशु श्री टेंडर घोटाले का मामला भी विपक्ष उठा सकता है। विपक्ष इस पूरे प्रकरण की जांच और सरकार की भूमिका को लेकर सवाल खड़े करने की तैयारी में है। इसके साथ ही राज्य में कानून-व्यवस्था, बढ़ते अपराध, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई गई है।
वहीं, एनडीए सरकार विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को प्रमुखता से सदन में रखेगी। सरकार निवेश, औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना, सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर हुए कार्यों का ब्यौरा पेश कर सकती है। साथ ही राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं और नई योजनाओं के जरिए सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखने का प्रयास करेगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह मानसून सत्र राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मंच का उपयोग अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति को धार देने के लिए करेंगे। ऐसे में पांच दिनों का यह सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी चुनावी माहौल की दिशा तय करने वाला भी साबित हो सकता है। फिलहाल सभी की नजरें सरकार की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। सत्र की तारीखों के औपचारिक ऐलान के बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।





