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Bihar MLC Election 2026 : एक गलती और वोट बेकार! 6 सवालों में समझिए बैलेट पेपर से रिजल्ट तक का पूरा खेल

बिहार MLC चुनाव विधानसभा चुनाव से बिल्कुल अलग है। यहां EVM नहीं, बैलेट पेपर से वोट पड़ता है और वरीयता के आधार पर गिनती होती है। जानिए 6 सवालों में वोटिंग, वोट रद्द होने के नियम, मतगणना और 8 सीटों का पूरा सियासी गणित।

Bihar MLC Election 2026 :  एक गलती और वोट बेकार! 6 सवालों में समझिए बैलेट पेपर से रिजल्ट तक का पूरा खेल
Tejpratap
Tejpratap
9 मिनट

बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनावी मुकाबला अब निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। विधानसभा या लोकसभा चुनाव से बिल्कुल अलग इस चुनाव में न तो EVM का इस्तेमाल होता है और न ही आम मतदाता वोट डालते हैं। यहां वोटिंग से लेकर मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया अलग है और सबसे खास है वरीयता के आधार पर मतदान। ऐसे में अगर आप जानना चाहते हैं कि MLC चुनाव में वोट कैसे पड़ता है, वोट कब रद्द हो सकता है, कौन वोट देता है और नतीजे किस तरह तय होते हैं, तो इन 6 सवालों में समझिए पूरा गणित।

सवाल 1: MLC चुनाव में वोट कैसे डाला जाता है?

MLC चुनाव में वोटिंग बैलेट पेपर से होती है। मतदाता को पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के सामने प्राथमिकता क्रमांक लिखना होता है। सबसे पसंद उम्मीदवार के सामने 1 (रोमन में ) लिखना जरूरी है। इसके बाद मतदाता चाहे तो दूसरे उम्मीदवार के सामने 2 और तीसरे के सामने 3 लिख सकता है। हालांकि केवल पहली पसंद यानी 1 दर्ज करना भी मान्य है।यानी यहां सिर्फ यह नहीं बताया जाता कि वोट किसे दिया, बल्कि जरूरत पड़ने पर यह भी बताया जा सकता है कि पहली पसंद के बाद दूसरी और तीसरी पसंद कौन है।

सवाल 2: छोटी सी गलती से वोट कैसे हो सकता है रद्द?

इस चुनाव में बैलेट पेपर भरते समय सावधानी बेहद जरूरी है। प्राथमिकता के सामने अंक में 1, 2, 3 आदि लिखना होता है। अगर किसी उम्मीदवार के सामने ‘एक’ शब्द लिख दिया, तो वोट अमान्य हो सकता है। इसी तरह नाम लिखने, अंगूठे का निशान लगाने या तय तरीके के बजाय कोई अन्य निशान बनाने पर भी वोट रद्द हो सकता है। सबसे अहम बात यह है कि एक ही प्राथमिकता नंबर दो उम्मीदवारों के सामने नहीं लिखा जा सकता। मसलन दो उम्मीदवारों के सामने 1 लिख दिया तो मतपत्र अमान्य हो सकता है।

सवाल 3: MLC चुनाव में वोट कौन डालता है?

यहां सबसे बड़ा फर्क यही है कि हर आम नागरिक MLC चुनाव में वोट नहीं डालता। अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अलग मतदाता होते हैं।

स्नातक सीट: कम से कम तीन साल पहले स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले पात्र मतदाता वोट देते हैं। केवल अपीयरिंग उम्मीदवार वोटर नहीं बनते।

शिक्षक सीट: निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले शिक्षक मतदाता होते हैं।

स्थानीय प्राधिकार सीट: नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि जैसे वार्ड पार्षद, मुखिया, सरपंच और जिला परिषद सदस्य वोट डालते हैं।

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र: राज्य के विधायक वोट करते हैं।

इसके अलावा विधान परिषद में राज्यपाल 12 सदस्यों को अलग-अलग क्षेत्रों से मनोनीत करते हैं। इनके लिए मतदान नहीं होता।

सवाल 4: बिहार विधान परिषद में 75 सदस्य कैसे आते हैं?

बिहार विधान परिषद में कुल 75 सदस्य होते हैं। इनमें अलग-अलग हिस्सों से सदस्य चुने जाते हैं। कुछ सदस्य स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, स्थानीय प्राधिकार और विधायकों के जरिए चुने जाते हैं, जबकि 12 सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं। यही वजह है कि विधान परिषद का चुनाव विधानसभा से अलग तरीके से होता है और इसके मतदाता भी अलग होते हैं।

सवाल 5: MLC चुनाव का रिजल्ट कैसे तय होता है?

MLC चुनाव का सबसे दिलचस्प हिस्सा इसकी मतगणना है। यहां केवल सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार ही सीधे विजेता नहीं बनता। पहले वरीयता मतों की गिनती होती है। पहली वरीयता के वोटों में अगर कोई उम्मीदवार जीत के लिए जरूरी 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर लेता है तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो सबसे कम पहली वरीयता वाले उम्मीदवार को बाहर किया जाता है। उसके बैलेट पर दर्ज दूसरी वरीयता को बचे हुए उम्मीदवारों के खाते में जोड़ा जाता है। इसके बाद भी किसी को जरूरी वोट नहीं मिले तो अगली वरीयता की गणना होती है। यह प्रक्रिया आगे बढ़ती रहती है। अंत में जब किसी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी मत मिल जाते हैं तो उसे विजेता घोषित किया जाता है। यानी MLC चुनाव का नतीजा सिर्फ पहली पसंद के वोटों से नहीं, बल्कि मतदाता की दूसरी और तीसरी पसंद से भी बदल सकता है।

सवाल 6: MLA और MLC में क्या अंतर है?

MLA यानी विधायक विधानसभा के सदस्य होते हैं, जबकि MLC विधान परिषद के सदस्य होते हैं। MLA का चुनाव आम मतदाताओं के सीधे मतदान से होता है। MLC का चुनाव अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों और निर्वाचक मंडलों के जरिए होता है। विधायक बनने की न्यूनतम उम्र 25 साल है, जबकि MLC बनने के लिए कम से कम 30 साल की उम्र जरूरी है। विधायक का सामान्य कार्यकाल 5 साल होता है, जबकि MLC का कार्यकाल 6 साल का होता है। विधान परिषद भंग नहीं होती और हर दो साल में इसके करीब एक-तिहाई सदस्यों का कार्यकाल पूरा होता है। वित्तीय मामलों और सरकार के गठन में विधानसभा की भूमिका ज्यादा निर्णायक होती है, जबकि विधान परिषद मुख्य रूप से विधेयकों की समीक्षा और सुझाव देने वाला सदन है।

अब नजर 8 सीटों के सियासी मुकाबले पर

पटना स्नातक सीट पर जदयू के नीरज कुमार, जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह और राजद के दिलीप कुमार के बीच मुकाबला है। इस चुनाव में अनंत सिंह की सक्रियता ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। वह डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में हैं और नीरज कुमार को हराने का दावा कर चुके हैं। 2020 में नीरज कुमार ने राजद के आजाद गांधी को 8,252 वोटों से हराया था।

पटना शिक्षक सीट पर बीजेपी के नवल किशोर यादव और राजद के संजीव कुमार सिंह के बीच मुकाबला बताया जा रहा है। नवल किशोर यादव 2020 में लगातार पांचवीं बार चुनाव जीते थे।

दरभंगा स्नातक सीट पर राजद ने अनिल कुमार झा को मैदान में उतारा है, जबकि छात्र नेता दिलीप कुमार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार निर्दलीय सर्वेश कुमार ने जीत दर्ज की थी और इस बार भाजपा से उनके मैदान में उतरने की चर्चा है।

दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा के सामने जदयू के प्रो. घनश्याम राय हैं। 2020 में मदन मोहन झा ने भाजपा के सुरेश प्रसाद राय को हराया था।

तिरहुत स्नातक सीट पर जदयू के अभिषेक झा और राजद की डॉ. रश्मि विनायक गौतम के बीच मुकाबला है। इस सीट का पिछला उपचुनाव खासा चर्चित रहा था, जब निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने अभिषेक झा समेत कई दिग्गज उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया था।

तिरहुत शिक्षक सीट पर सीपीआई के संजय कुमार सिंह फिर मैदान में हैं। जन सुराज ने भूषण झा को उम्मीदवार बनाया है। पिछली बार संजय सिंह ने भूषण झा को हराया था।

कोसी स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. एनके यादव और राजद के नितेश कुमार के बीच मुख्य मुकाबला है। कांग्रेस से अलग होकर निर्दलीय मैदान में उतरे अमित विक्रम और जन सुराज के रजनीश रंजन ने भी मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। 2020 में एनके यादव ने जीत दर्ज की थी।

वहीं सारण शिक्षक सीट पर जन सुराज के अफाक अहमद, राजद के प्रो. जयराम यादव और जदयू के आनंद पुष्कर आमने-सामने हैं। 2023 के उपचुनाव में अफाक अहमद ने जीत दर्ज कर इस सीट को अपने कब्जे में लिया था।

कुल मिलाकर बिहार का MLC चुनाव सिर्फ 8 सीटों की लड़ाई नहीं है। यह चुनाव बैलेट पेपर, वरीयता वोट और बेहद अलग मतगणना प्रणाली के कारण विधानसभा चुनाव से पूरी तरह अलग है। वहीं इन 8 सीटों पर आमने-सामने खड़े सियासी चेहरे आने वाले दिनों में विधान परिषद की तस्वीर और बिहार की राजनीति के समीकरण पर भी असर डाल सकते हैं।