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Bihar Politics : पलट गई BJP, पहले दोनों MLC को दल में शामिल कराया,विवाद बढ़ने पर सफाई - समर्थन दिया है

बिहार की सियासत में बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन दूर हो गया है। BJP ने साफ किया है कि दोनों निर्दलीय MLC ने पार्टी की सदस्यता नहीं ली, बल्कि BJP और NDA को अपना समर्थन दिया है।

Bihar Politics : पलट गई BJP, पहले दोनों MLC को दल में शामिल कराया,विवाद बढ़ने पर सफाई - समर्थन दिया है
Tejpratap
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7 मिनट

बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव के बाद बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज को लेकर चल रही चर्चाओं पर अब भाजपा की ओर से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय जीत दर्ज करने वाले बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित राहुल राज के भाजपा में शामिल होने की खबरों के बीच अब पार्टी नेताओं ने दोनों के समर्थन को लेकर बड़ा बयान दिया है। भाजपा नेताओं के मुताबिक, दोनों विधान पार्षदों ने पार्टी की सदस्यता नहीं ली है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी और एनडीए को अपना समर्थन दिया है।


अरवल विधायक मनोज शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखते हुए कहा कि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर आए विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित राहुल राज ने भाजपा को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व और एनडीए के वरिष्ठ एवं सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार के नेतृत्व में जताया गया है।


मनोज शर्मा के इस बयान के बाद भाजपा में शामिल होने को लेकर उठ रहे सवालों को नया मोड़ मिल गया है। अब तक दोनों विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने की चर्चा थी, लेकिन पार्टी विधायक ने इसे सदस्यता के बजाय समर्थन का मामला बताया है। इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों ने भाजपा की नीतियों और एनडीए के नेतृत्व के प्रति अपना भरोसा जताया है।


इस बीच भाजपा के प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने भी दोनों विधान पार्षदों के समर्थन को लेकर पार्टी का पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि नव निर्वाचित एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज एनडीए तथा भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर भारतीय जनता पार्टी को अपना समर्थन दे रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता के इस बयान से भी यह संकेत मिलता है कि भाजपा फिलहाल दोनों के समर्थन को राजनीतिक रूप से अहम मान रही है।


इससे पहले दोनों विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने की खबरों ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। 31 अक्टूबर को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में दोनों निर्दलीय एमएलसी भी पहुंचे थे। इस बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। दोनों की मौजूदगी के बाद उनके भाजपा में जाने की चर्चा तेज हो गई थी। हालांकि, अब भाजपा विधायक मनोज शर्मा और प्रवक्ता कुंतल कृष्ण के बयानों ने सदस्यता के बजाय समर्थन की बात को प्रमुखता दी है।


जेडीयू उम्मीदवारों को हराकर सदन पहुंचे हैं दोनों एमएलसी

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात यह है कि बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज दोनों ने हालिया विधान परिषद चुनाव में एनडीए समर्थित उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की थी। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बंशीधर ब्रजवासी ने जेडीयू उम्मीदवार अभिषेक झा को बड़े अंतर से पराजित किया। ब्रजवासी को 31,832 वोट मिले, जबकि अभिषेक झा को 22,685 वोट प्राप्त हुए। इस तरह उन्होंने 9,147 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। Jagran +1


बंशीधर ब्रजवासी के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि उन्होंने लगातार दूसरी बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी ताकत साबित की। इससे पहले 2024 में देवेश चंद्र ठाकुर के सीतामढ़ी से सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई तिरहुत स्नातक सीट पर उपचुनाव हुआ था। उस समय भी ब्रजवासी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर राजनीतिक दलों को चौंका दिया था।


शिक्षकों की लड़ाई से राजनीति तक पहुंचे बंशीधर ब्रजवासी

बंशीधर ब्रजवासी की पहचान लंबे समय से शिक्षकों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले नेता के रूप में रही है। वह शिक्षकों की समस्याओं, सेवा शर्तों और शिक्षा विभाग की नीतियों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। केके पाठक के शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव रहने के दौरान भी ब्रजवासी अपने विरोध और बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में आए थे। शिक्षकों के मुद्दों पर विभाग से टकराव और निलंबन की कार्रवाई के बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान को और मजबूत किया।


राहुल राज ने भी निर्दलीय लड़कर मारी बाजी

दूसरी तरफ सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित राहुल राज की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। वह पहले भाजपा से जुड़े रहे थे, लेकिन टिकट बंटवारे और गठबंधन की राजनीतिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। चुनाव में उन्होंने एनडीए समर्थित जेडीयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर को 1,815 मतों से हराकर जीत हासिल की। राहुल राज को 4,965 वोट मिले, जबकि आनंद पुष्कर को 3,150 वोट प्राप्त हुए।  अब जीत के बाद राहुल राज का भाजपा नेतृत्व के साथ आना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों के समर्थन से विधान परिषद में भाजपा और एनडीए की स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


जेडीयू के लिए क्या है राजनीतिक संदेश?

इस घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी है। दोनों विधान पार्षदों ने चुनाव में जेडीयू समर्थित उम्मीदवारों को हराया था। इसके बावजूद चुनाव के बाद उनका भाजपा और एनडीए के नेतृत्व को समर्थन देना बिहार की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। खासकर भाजपा और जेडीयू के रिश्तों के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।फिलहाल भाजपा की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज ने पार्टी की नीतियों तथा एनडीए नेतृत्व से प्रभावित होकर समर्थन दिया है। ऐसे में अब दोनों को भाजपा का सदस्य मानने के बजाय समर्थक निर्दलीय विधान पार्षद के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा। आने वाले दिनों में विधान परिषद के भीतर उनका रुख और सरकार के प्रति उनका समर्थन बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।