Bihar News : बिहार में मजदूरी करके घर चलाने वाले करोड़ों लोगों के लिए अक्टूबर से कमाई का नया हिसाब लागू हो गया है। अब राज्य में काम करने वाले मजदूरों को उनकी श्रेणी और काम के हिसाब से पहले से ज्यादा भुगतान करना होगा। न्यूनतम मजदूरी की नई दरों में प्रतिदिन 7 रुपये से लेकर 10 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। इस बदलाव का असर सिर्फ निर्माण कार्य में लगे मजदूरों पर ही नहीं, बल्कि दुकानों, निजी संस्थानों, उद्योगों, कृषि और दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों पर भी पड़ेगा।
राज्य सरकार के इस फैसले से करीब साढ़े तीन करोड़ कामगारों को फायदा पहुंचने की बात कही जा रही है। खास बात यह है कि नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हैं। यानी अक्टूबर महीने से ही मजदूरों को संशोधित न्यूनतम मजदूरी के हिसाब से भुगतान मिलना चाहिए। ऐसे में अगर आप भी बिहार में किसी संस्थान, दुकान, कंपनी या दूसरे प्रतिष्ठान में काम करते हैं तो आपके लिए नई मजदूरी दरों को जानना जरूरी है।
बिहार में न्यूनतम मजदूरी की नई दरें लागू होने के बाद अब अलग-अलग श्रेणी के कामगारों की दैनिक कमाई में बदलाव हो गया है। अकुशल मजदूरों को अब 443 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे। अर्धकुशल कामगारों के लिए यह राशि 459 रुपये तय की गई है। वहीं कुशल श्रमिकों को 560 रुपये और अतिकुशल श्रेणी के कामगारों को 682 रुपये प्रतिदिन देने होंगे। इससे पहले इन चारों श्रेणियों के लिए क्रमशः 436, 452, 551 और 672 रुपये निर्धारित थे।
इस तरह देखें तो अकुशल और अर्धकुशल श्रमिकों की मजदूरी में 7 रुपये, कुशल श्रमिकों की मजदूरी में 9 रुपये और अतिकुशल श्रमिकों की मजदूरी में 10 रुपये प्रतिदिन का इजाफा हुआ है। यह बढ़ोतरी उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें हर दिन काम करने के बाद ही घर का खर्च चलाने के लिए पैसे मिलते हैं। खासकर निर्माण कार्य, फैक्ट्री, छोटे कारोबार और निजी प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
इस बार मजदूरी बढ़ाने के साथ सरकार ने कामगारों की श्रेणियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। विभाग ने अकुशल श्रेणी में 31 तरह के कामगारों को रखा है। अर्धकुशल श्रेणी में 40 तरह के काम शामिल हैं। वहीं कुशल श्रेणी में 50 और अतिकुशल श्रेणी में 21 तरह के कामगारों को शामिल किया गया है। यानी किसी कर्मचारी को कितनी मजदूरी मिलेगी, यह उसके काम की प्रकृति और कौशल के आधार पर तय होगा।
इस फैसले का एक बड़ा पहलू असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक हैं। बिहार में कुल कामगारों में करीब 90 फीसदी लोग असंगठित क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इनकी संख्या 3.26 करोड़ से अधिक बताई गई है। ऐसे कामगारों को अक्सर नियमित वेतन, छुट्टी और दूसरी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। अब न्यूनतम मजदूरी की नई दरों से उन्हें निर्धारित भुगतान मिलने का रास्ता मजबूत होगा। हालांकि इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब नियोक्ता नई दरों का पालन करेंगे।
सरकार ने कृषि क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए भी मजदूरी की दरों में संशोधन किया है। कटनी के काम को छोड़कर खेती से जुड़े दूसरे कार्यों के लिए दैनिक मजदूरी 413 रुपये से बढ़ाकर 419 रुपये कर दी गई है। वहीं ट्रैक्टर चलाने वाले ड्राइवर और पंप ऑपरेटर की मासिक मजदूरी 14,947 रुपये से बढ़ाकर 15,180 रुपये कर दी गई है। ट्रैक्टर के खलासी को अब 11,633 रुपये के बजाय 11,814 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। फसल कटाई के मामले में भुगतान का आधार अलग रखा गया है। इसमें काटी गई फसल के 10 बोझा में से एक बोझा मजदूरी के रूप में देने का प्रावधान बताया गया है।
न्यूनतम मजदूरी के दायरे को लेकर भी इस बार महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी दी गई है। विभाग के मुताबिक शिक्षक, नर्स और अन्य अतिकुशल श्रेणी के कामगारों को भी निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का लाभ देना होगा। निजी स्कूलों और अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था खास मायने रखती है। अतिकुशल श्रेणी के लिए न्यूनतम मासिक मजदूरी 17,732 रुपये निर्धारित बताई गई है। इसका मतलब है कि संबंधित श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों को इससे कम भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।
अब सवाल यह है कि अगर किसी मजदूर या कर्मचारी को नई दर के अनुसार पैसे नहीं मिलते हैं तो वह क्या कर सकता है? विभाग ने इसके लिए शिकायत की व्यवस्था भी बताई है। कामगार अपने प्रखंड के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी या जिले के श्रम अधीक्षक से शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा पटना स्थित नियोजन भवन में श्रम विभाग के मुख्यालय में भी अपनी बात रख सकते हैं। शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 155214 भी जारी किया गया है।
विभाग के अनुसार शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों की ओर से मामले की जांच की जाएगी। अगर जांच में यह साबित होता है कि संबंधित नियोक्ता ने कामगार को तय न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान किया है तो उस पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। मजदूरी भुगतान की निगरानी को बेहतर बनाने के लिए विभाग एक पोर्टल शुरू करने की तैयारी भी कर रहा है।
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के अनुसार मजदूरी की नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। सामान्य तौर पर बिहार में न्यूनतम मजदूरी की दरों में साल में दो बार, एक अप्रैल और एक अक्टूबर को संशोधन किया जाता है। इस बार तकनीकी कारणों से अधिसूचना जारी होने में देरी हुई, लेकिन नई दरों को एक अक्टूबर से ही लागू माना गया है। ऐसे में संबंधित कामगारों को संशोधित दर के हिसाब से भुगतान मिलना चाहिए।





