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Bihar Migration : बिहार छोड़कर दूसरे राज्यों में जाने वालों के लिए बड़ी खबर, CM सम्राट ने बताया पलायन रोकने का प्लान

बिहार से पलायन की समस्या पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि 2030 से पहले बिहार से पलायन रुक जाएगा। शिक्षा, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और नए शहरों के विकास से राज्य की तस्वीर बदलने का लक्ष्य है।

Bihar Migration
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Tejpratap
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पटना: बिहार की राजनीति में पलायन हमेशा से एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा रहा है। रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आर्थिक अवसरों की तलाश में हर साल बड़ी संख्या में बिहार के लोग दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और दक्षिण भारत के कई शहरों में बिहार से गए कामगारों की बड़ी संख्या देखने को मिलती है। ऐसे में अब बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पलायन को लेकर एक बड़ा दावा किया है।

एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जब बिहार की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल पलायन को लेकर सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने भविष्य को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा। मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या 2027 के बाद बिहार में पलायन रोकने के लिए कोई ऐसा प्लान है, जिससे राज्य के लोगों को रोजगार और बेहतर भविष्य के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत न पड़े?

इस सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि 2030 से पहले बिहार से पलायन रुक जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में राज्य का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, संस्थान बेहतर होंगे और बच्चों की पढ़ाई से लेकर युवाओं के रोजगार तक की व्यवस्था बिहार में ही विकसित की जाएगी।

2030 तक बिहार की तस्वीर बदलने का दावा

मुख्यमंत्री के इस बयान ने बिहार के विकास को लेकर एक बड़ी उम्मीद पैदा की है। उनका कहना है कि वर्ष 2030 तक बिहार में बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षा और रोजगार तक के क्षेत्र में बड़े बदलाव दिखाई देंगे। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि बिहार को इस तरह विकसित करने की कोशिश की जा रही है कि यहां के लोगों को अपने बेहतर भविष्य के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और लोगों को बेहतर जीवन के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े—सरकार का लक्ष्य इसी दिशा में काम करने का है।

गांवों की बदलेगी सूरत, नए शहर होंगे तैयार

सम्राट चौधरी ने सिर्फ रोजगार तक ही बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने बिहार के गांवों और शहरों के भविष्य की भी तस्वीर पेश की। मुख्यमंत्री के मुताबिक आने वाले समय में बिहार में नए शहर बसने शुरू होंगे और गांवों को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर किया जाएगा। सड़क, आवागमन और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ-साथ गांवों का वातावरण भी बेहतर बनाने पर काम होगा। यानी सरकार की कोशिश सिर्फ बड़े शहरों को विकसित करने की नहीं, बल्कि ग्रामीण बिहार को भी आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की है।

अगर यह योजना जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू होती है तो इसका सीधा असर बिहार से होने वाले रोजगार आधारित पलायन पर पड़ सकता है। क्योंकि बड़ी संख्या में लोग गांव और छोटे शहरों से इसलिए बाहर जाते हैं क्योंकि उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं।

पढ़ाई से नौकरी तक बिहार में अवसर देने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में शिक्षा और रोजगार को पलायन रोकने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाई से लेकर नौकरी तक की व्यवस्था बिहार में ही उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।

यानी आने वाले वर्षों में सरकार की कोशिश यह होगी कि बिहार के युवाओं को उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर न देखना पड़े। इसके लिए बेहतर संस्थानों और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार पर जोर देने की बात कही गई है।

आर्थिक रूप से मजबूत होगा बिहार?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि बिहार आर्थिक रूप से समृद्ध होना शुरू होगा। उनका मानना है कि जैसे-जैसे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, नए शहर विकसित होंगे, संस्थान बेहतर होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वैसे-वैसे बिहार की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

दरअसल, बिहार से पलायन केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है। इसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था, परिवारों, गांवों और सामाजिक संरचना तक दिखाई देता है। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होती हैं तो पलायन के दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अब सवाल- क्या 2030 तक पूरा होगा लक्ष्य?

मुख्यमंत्री का दावा बड़ा है—2030 से पहले बिहार से पलायन रुक जाएगा। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार की योजनाएं कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं। बिहार के करोड़ों लोगों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि अगले कुछ वर्षों में रोजगार, शिक्षा, उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कितना बदलाव आता है।

अगर मुख्यमंत्री की कही बात के मुताबिक बिहार में पढ़ाई से लेकर रोजगार तक के पर्याप्त अवसर पैदा होते हैं, नए शहर विकसित होते हैं और गांवों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत होती हैं, तो निश्चित रूप से बिहार के विकास की तस्वीर बदल सकती है।

फिलहाल 2030 की डेडलाइन ने बिहार के विकास और पलायन के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री का यह बड़ा दावा आने वाले वर्षों में कितना जमीन पर उतरता है और क्या सच में बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।