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Bihar land registration : अब पहले की तरह आसान नहीं होगा जमीन खरीदना-बेचना, लागू होंगे यह नया बदलाव; इस तकनीक पर होगा काम

बिहार में जमीन रजिस्ट्री अब और भी सुरक्षित होगी। GIS तकनीक से जमीन का फिजिकल सत्यापन अनिवार्य किया गया है, जिससे गलत जानकारी देकर रजिस्ट्री करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

Bihar land registration : अब पहले की तरह आसान नहीं होगा जमीन खरीदना-बेचना, लागू होंगे यह नया बदलाव; इस तकनीक पर होगा काम
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar land registration : बिहार में जमीन खरीदना-बेचना अब पहले जैसा आसान नहीं रहेगा, बल्कि अब यह पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित हो जाएगा। सरकार ने जमीन रजिस्ट्री (निबंधन) प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है, ताकि गलत जानकारी देकर रजिस्ट्री कराने की कोशिश लगभग नामुमकिन हो जाए। इस बदलाव का मुख्य आधार है GIS तकनीक के जरिए जमीन का फिजिकल वेरीफिकेशन करना।


GIS से जमीन का सत्यापन अनिवार्य

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने यह निर्देश जारी किया है कि अब जमीन की रजिस्ट्री से पहले उसकी फिजिकल वेरिफिकेशन GIS तकनीक के माध्यम से किया जाएगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जमीन की वास्तविक स्थिति, क्षेत्रफल और उस पर बनी संरचनाओं की पूरी जानकारी सही ढंग से दर्ज हो। अक्सर रजिस्ट्री के समय जमीन को खाली बताकर या उस पर बने निर्माण की जानकारी छिपाकर गलत विवरण दिया जाता है, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान होता है। GIS तकनीक से जमीन की लोकेशन, क्षेत्रफल, आसपास का ढांचा और निर्माण का डिजिटल सत्यापन किया जाएगा, जिससे कागजों पर लिखी जानकारी और जमीन की हकीकत में कोई अंतर नहीं रह सकेगा।


निबंधन अधिकारी और कर्मचारियों की जिम्मेदारी

नए नियमों के अनुसार नगर निकाय क्षेत्रों में जमीन और उस पर बनी संरचना का निरीक्षण खुद निबंधन पदाधिकारी करेंगे। अन्य इलाकों में यह जिम्मेदारी कार्यालय अधीक्षक, प्रधान लिपिक और अन्य अधिकृत कर्मचारियों को दी जा सकती है। साथ ही, कर्मचारियों द्वारा किए गए निरीक्षणों में से 10% मामलों का क्रॉस वेरिफिकेशन भी निबंधन पदाधिकारी करेंगे, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।


रजिस्ट्री के तीन दिनों के भीतर निरीक्षण अनिवार्य

अब रजिस्ट्री आवेदन के तीन दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण कराना अनिवार्य होगा। GIS सत्यापन के बाद ही रजिस्ट्री को पूर्ण माना जाएगा। फ्लैट रजिस्ट्री के मामलों में बिल्डर एसोसिएशन और RERA के साथ समन्वय किया जाएगा, ताकि खरीदारों को सही जानकारी मिल सके और फ्लैट के वास्तविक विवरण के साथ रजिस्ट्री हो।


जनजागरूकता और तकनीक आधारित रिकॉर्डिंग

सरकार चलंत निबंधन इकाइयों और कैंपों के माध्यम से लोगों को नए नियमों के बारे में जागरूक भी करेगी। साथ ही, अब सभी रजिस्ट्री कार्यालयों से नॉन-इनकंबरेंस सर्टिफिकेट (NEC) और सच्ची प्रतिलिपि ऑनलाइन जारी होगी। पुराने दस्तावेज अगर डिजिटल नहीं हैं तो उनकी कॉपी ऑफलाइन दी जाएगी, लेकिन उसका ऑनलाइन रिकॉर्ड अवश्य दर्ज होगा।


राजस्व लक्ष्य और GIS का महत्व

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 9130 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 5662.51 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई है। विभाग का मानना है कि गलत विवरण और अपूर्ण जांच इसकी बड़ी वजह हैं। GIS तकनीक लागू होने से इस अंतर को कम करने में मदद मिलेगी और राजस्व चोरी पर रोक लगेगी।


अधिकारी निरीक्षण और कार्रवाई तेज

सचिव अजय यादव ने सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जाए और नीलामवाद, 47-ए जैसे मामलों में तेजी लाई जाए। सभी CO (अंचलाधिकारी) को सप्ताह में कम से कम तीन दिन कार्यालयों का निरीक्षण करना होगा। रविवार को भी निरीक्षण अनिवार्य होगा और उसकी रिपोर्ट तय समय पर विभाग को देनी होगी।


यह बदलाव बिहार में जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया को तकनीक आधारित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। GIS तकनीक के जरिए सत्यापन और कड़ी निगरानी से जमीन से जुड़े घोटाले और राजस्व नुकसान पर लगाम लगेगी, जिससे आम लोगों को भी सुरक्षित तरीके से संपत्ति का लेन-देन करने में मदद मिलेगी।