Bihar News : बिहार की राजधानी पटना समेत राज्य के कई जिलों में वर्षों से खासमहाल की जमीन पर रह रहे हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार अब ऐसे लोगों को जमीन का मालिकाना हक देने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इसके लिए नई नीति तैयार करने में जुटा है, जिससे लंबे समय से बसे लोगों को कानूनी अधिकार मिल सके।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बुधवार को पटना के सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार खासमहाल की भूमि पर दशकों से रह रहे लोगों की समस्याओं को समझते हुए स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मंत्री ने बताया कि राज्य के सासाराम, पूर्णिया, कटिहार समेत कई जिलों में ऐसे हजारों परिवार हैं, जो पिछले 60 से 70 वर्षों से खासमहाल की जमीन पर रह रहे हैं। लंबे समय से वहां निवास करने के बावजूद उन्हें जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। इसके कारण लोगों को मकान निर्माण, बैंक ऋण, संपत्ति हस्तांतरण और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद विभाग द्वारा खासमहाल की भूमि पर रहने वाले लोगों के साथ विस्तृत विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही न्यायालयों के पुराने फैसलों और कानूनी पहलुओं की भी समीक्षा की जाएगी। इसके बाद सरकार अंतिम निर्णय लेकर नई व्यवस्था लागू कर सकती है।
सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि जमीन का मालिकाना हक देने के लिए संबंधित लोगों से बाजार मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत लिया जाए। राशि तय होने के बाद जमीन को फ्रीहोल्ड किया जा सकता है। इससे निवासियों को अपनी संपत्ति पर पूर्ण अधिकार मिल जाएगा और वे कानूनी रूप से जमीन के स्वामी बन सकेंगे।
प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार खासमहाल की कुछ जमीनों पर बहुमंजिली आवासीय परियोजनाएं विकसित करने की संभावना पर भी विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो सरकार जमीन को अपने नियंत्रण में लेकर वहां आधुनिक बहुमंजिली भवनों का निर्माण कर सकती है, जिससे अधिक लोगों को आवास उपलब्ध कराया जा सके।
विभागीय कार्यों की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य की 28 केंद्रीय और राज्य स्तरीय विकास योजनाओं के लिए 1380.59 एकड़ सरकारी भूमि उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा लगभग 45,748 एकड़ भूमि का अधिग्रहण विभिन्न जनहित परियोजनाओं के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सड़क, पुल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और अन्य विकास योजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
मंत्री ने विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सख्त रुख दिखाया। उन्होंने बताया कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक 144 अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र प्राप्त हुए हैं, जबकि 124 अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
इसके अलावा वर्ष 2025 में 166 अधिकारियों और वर्ष 2026 में अब तक 66 अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई तय की जा चुकी है। सरकार का उद्देश्य भूमि प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाना है।यदि सरकार की यह योजना लागू होती है तो खासमहाल की जमीन पर दशकों से रह रहे हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है और उन्हें अपनी जमीन पर कानूनी अधिकार प्राप्त हो सकेगा।





