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Bihar News : अब बच नहीं पाएंगे बालू माफिया! बिहार में छापेमारी टीमों को मिलेंगे बॉडी कैमरे, हर कार्रवाई होगी रिकॉर्ड

बिहार में अवैध बालू और खनिज खनन पर सख्ती बढ़ने वाली है। खान एवं भू-तत्व विभाग अब छापेमारी टीमों को बॉडी वार्न कैमरों से लैस करेगा, जिससे हर कार्रवाई की लाइव रिकॉर्डिंग होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

Bihar News : अब बच नहीं पाएंगे बालू माफिया! बिहार में छापेमारी टीमों को मिलेंगे बॉडी कैमरे, हर कार्रवाई होगी रिकॉर्ड
Tejpratap
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Bihar News : बिहार में बालू, पत्थर और अन्य खनिजों के अवैध खनन तथा परिवहन पर लगाम कसने के लिए खान एवं भू-तत्व विभाग अब अपनी पूरी जांच और कार्रवाई प्रणाली को हाईटेक बनाने की तैयारी में जुट गया है। विभाग ने पुलिस विभाग की तर्ज पर छापेमारी और जांच टीमों को आधुनिक तकनीक से लैस करने की योजना बनाई है। इसके तहत अब कार्रवाई के दौरान बाडी वार्न कैमरे, लाइव वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्य आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने पर गंभीरता से काम शुरू कर दिया गया है।


सूत्रों के मुताबिक हाल ही में खान एवं भू-तत्व विभाग के सहायक निदेशक आनंद प्रकाश की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें अवैध खनन, परिवहन, वाहन जब्ती और छापेमारी अभियान को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि अब विभागीय कार्रवाई को तकनीक आधारित बनाया जाए ताकि पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके।


नई व्यवस्था के तहत अवैध खनन और परिवहन की जांच के लिए निकलने वाली टीमों को पुलिस की तरह बाडी वार्न कैमरों से लैस किया जाएगा। ये कैमरे मौके पर होने वाली पूरी कार्रवाई की लाइव रिकॉर्डिंग करेंगे। इससे वाहन जांच, चालान सत्यापन, जब्ती प्रक्रिया और अधिकारियों की कार्रवाई का हर चरण डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा।


विभाग का मानना है कि कई बार कार्रवाई के दौरान विवाद, दबाव या आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे मामलों में वीडियो रिकॉर्डिंग मजबूत साक्ष्य के रूप में काम करेगी और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। साथ ही फील्ड में तैनात अधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।


खास बात यह है कि विभाग सिर्फ कैमरों तक ही सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि मोबाइल आधारित निगरानी, ऑनलाइन डेटा संग्रहण और डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन प्रणाली को भी एकीकृत करने की दिशा में मंथन कर रहा है। इसके लिए पुलिस और परिवहन विभाग में पहले से लागू तकनीकी व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही अन्य राज्यों में अवैध खनन रोकने के लिए अपनाए गए आधुनिक मॉडल और निगरानी प्रणालियों का भी परीक्षण किया जाएगा।


अधिकारियों का कहना है कि तकनीक आधारित यह निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद अवैध खनन माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इससे कार्रवाई में पारदर्शिता आएगी और विभागीय टीमों को भी बेहतर सुरक्षा और कानूनी मजबूती मिलेगी।


वहीं विभाग की हालिया रिपोर्ट भी अवैध खनन के खिलाफ चल रही सख्ती को दर्शाती है। वर्ष 2025-26 में खान एवं भू-तत्व विभाग ने अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ 50 हजार से अधिक छापेमारी अभियान चलाए। इस दौरान 2727 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं। कार्रवाई में सात सौ से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 6214 वाहनों को जब्त किया गया। इतना ही नहीं, विभाग ने कार्रवाई के दौरान 82 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी वसूला है। सरकार और विभाग को उम्मीद है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद बिहार में अवैध खनन और खनिजों की तस्करी पर पहले से ज्यादा प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।