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Bihar में शिक्षकों की नियुक्ति में हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा: जाली दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले 2912 टीचर पकड़े गये, अभी और मामले सामने आयेंगे

राज्य में नियोजित शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में अब तक 2,912 शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए हैं, जबकि 1,707 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। जांच अभी जारी है।

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सेवा से होंगे बर्खास्त
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Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA (Bihar Teachers News): बिहार में सालों से नौकरी कर रहे शिक्षकों के सर्टिफिकेट की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की गहन जांच के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जीवाडा पकड़ा गया है. निगरानी विभाग सारे शिक्षकों की डिग्री की जांच कर रहा है और अब तक की जांच में 2,912 शिक्षकों के सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए हैं. 


निगरानी ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार,  जाली डिग्री देकर नौकरी कर रहे शिक्षकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है. फर्जी सर्टिफिकेट वाले 1,707 शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं. निगरानी ब्यूरो ने कहा है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और हर महीने इसकी समीक्षा की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए।


साढ़े 6 लाख शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच पूरी

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि अब तक 6 लाख 46 हजार 796 शिक्षकों के मूल शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की जांच पूरी की जा चुकी है. उनके प्रमाण-पत्रों का सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालयों, बोर्डों और शैक्षणिक संस्थानों से कराया गया है. जांच के दौरान हजारों ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें शिक्षकों द्वारा दिया गया दस्तावेज संस्थानों के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे. 


2025 में 126 नई प्राथमिकी दर्ज

निगरानी ब्यूरो के मुताबिक साल 2025 में ही अलग-अलग जिलों में 126 नई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं. निगरानी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार मार्च महीने में सबसे अधिक 21 मामले सामने आए. वहीं, जनवरी में 16 और नवंबर में 15 प्राथमिकी दर्ज की गईं. निगरानी के मुताबिक फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने का मामला राज्यभर में फैला हुआ है।


फर्जी डिग्री रैकेट का भी हुआ खुलासा

जांच के दौरान विश्वविद्यालयों और बोर्डों से कराए गए सत्यापन में फर्जी डिग्री रैकेट के भी संकेत मिले हैं. इन रैकेटों के जरिए वर्षों से फर्जी शैक्षणिक प्रमाण-पत्र तैयार कर सरकारी नौकरियां दिलाने का काम किया जा रहा था. कुछ मामलों में एजेंटों और बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है, जिनके खिलाफ अलग से जांच की जा रही है.


सेवा से बर्खास्तगी होगी

निगरानी ब्यूरो ने साफ किया है कि जांच पूरी होने के बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त किया जायेगा. साथ ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी. फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और जैसे-जैसे सत्यापन आगे बढ़ेगा, फर्जी प्रमाण-पत्रों पर बहाल शिक्षकों की संख्या और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.