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Bihar News : बिहार में बिजली बनी ‘कमाई की मशीन’! जानिए कैसे सस्ता होगा आपका बिल; उपभोक्ताओं के लिए आई खुशखबरी

बिहार की बिजली कंपनियों ने FY 2025-26 में 19 हजार करोड़ से अधिक की रिकॉर्ड कमाई की है। बेहतर सेवाओं और समय पर बिल भुगतान से यह बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है।

Bihar News : बिहार में बिजली बनी ‘कमाई की मशीन’! जानिए कैसे सस्ता होगा आपका बिल; उपभोक्ताओं के लिए आई खुशखबरी
Tejpratap
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Bihar News : बिहार की बिजली वितरण कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कमाई का नया इतिहास रच दिया है। राज्य की दोनों प्रमुख वितरण कंपनियों—एनबीपीडीसीएल और एसबीपीडीसीएल—ने मिलकर 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1916 करोड़ रुपये यानी करीब 12 फीसदी ज्यादा है। यह उपलब्धि न सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र के लिए अहम है, बल्कि राज्य की आर्थिक मजबूती का भी संकेत देती है।


इस शानदार प्रदर्शन में एनबीपीडीसीएल ने 8,866 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जबकि एसबीपीडीसीएल ने 10,169 करोड़ रुपये की कमाई की। ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी नेतृत्व और राज्य सरकार की जनहितकारी नीतियों को दिया है। उनके अनुसार, बिजली क्षेत्र में किए गए सुधारों और पारदर्शिता ने उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाया है।


इस उपलब्धि के पीछे राज्य के उपभोक्ताओं की बड़ी भूमिका रही है। समय पर बिजली बिल जमा करने की आदत और बेहतर सेवा के कारण लोगों का भरोसा कंपनियों पर मजबूत हुआ है। चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति ने भी उपभोक्ताओं को नियमित भुगतान के लिए प्रेरित किया। यही कारण है कि वितरण कंपनियों ने रिकॉर्ड स्तर पर राजस्व संग्रह किया है।


ऊर्जा विभाग के सचिव मनोज कुमार सिंह ने बताया कि सरकारी विभागों से भी इस वर्ष 2200 करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ है। इसमें शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पंचायती राज, स्वास्थ्य, राजस्व एवं भूमि सुधार, गृह (पुलिस), खेल, उद्योग और पर्यटन विभाग शामिल हैं। इन विभागों के केंद्रीकृत भुगतान ने कंपनियों की वित्तीय स्थिति को और मजबूत किया है।


बिजली कंपनियों ने राज्य के राजकोष में 2263 करोड़ रुपये जमा किए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है। इसके अलावा वाणिज्यकर विभाग को विद्युत शुल्क के रूप में 2234 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि जीएसटी मद में भी 29 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। इससे साफ है कि बिजली क्षेत्र अब राज्य के राजस्व का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।


आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के कई फैसले किए हैं। शहरी घरेलू और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए 100 यूनिट से अधिक खपत पर लगने वाली अतिरिक्त दर को समाप्त कर दिया गया है। अब सभी यूनिटों पर न्यूनतम दर लागू होगी। इस फैसले से शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को 1.53 रुपये प्रति यूनिट, ग्रामीण गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को 0.42 रुपये और शहरी गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को 1.20 रुपये प्रति यूनिट की बचत होगी।


इसके साथ ही, मशरूम की खेती को कृषि का दर्जा दिया गया है, जिससे किसानों को बिजली दरों में राहत मिलेगी और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं (कृषि को छोड़कर) और सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए टीओडी (टाइम ऑफ डे) टैरिफ को अनिवार्य कर दिया गया है। इससे बिजली के उपयोग को संतुलित करने और पीक आवर्स में लोड कम करने में मदद मिलेगी।


कुल मिलाकर, बिहार का बिजली क्षेत्र तेजी से प्रगति कर रहा है। बेहतर प्रबंधन, तकनीकी सुधार और उपभोक्ताओं के सहयोग से यह क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।