Bihar Education System: बिहार की शिक्षा व्यवस्था में आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब पढ़ाई का फोकस सिर्फ किताबों और पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों को कौशल, तकनीकी शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत राज्य के हर जिले में एक स्कूल को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की योजना है।इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ ऐसे पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर होगा, जो आगे चलकर उनके करियर और रोजगार में मददगार साबित हो सकें।
हर जिले में एक स्कूल बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार बिहार के प्रत्येक जिले में एक स्कूल का चयन कर उसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित किया जाएगा। इन स्कूलों में पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक और कौशल आधारित शिक्षा को जोड़ा जाएगा।
विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ अलग-अलग कैरियर विकल्प, तकनीकी प्रशिक्षण, व्यावसायिक पाठ्यक्रम और रोजगार से जुड़े अवसरों की जानकारी और प्रशिक्षण देने की व्यवस्था पर काम किया जाएगा। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को इस दिशा में एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। स्कूलों के चयन से लेकर वहां जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने, आधुनिक पाठ्यक्रम तैयार करने और प्रशिक्षण की व्यवस्था करने तक के बिंदुओं को योजना में शामिल किया जाएगा।
अब पुराने ट्रेड की जगह नए जमाने के स्किल
बिहार में व्यावसायिक शिक्षा के मौजूदा ट्रेड और सिलेबस की भी समीक्षा की जाएगी। शिक्षा विभाग ऐसे ट्रेड और पाठ्यक्रमों को हटाने की तैयारी में है, जिनकी वर्तमान समय में उपयोगिता कम हो गई है। इनकी जगह मॉडर्न, स्किल बेस्ड और रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रस्तावित क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एनिमेशन डिजाइनिंग, रोबोटिक्स, मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषय शामिल हैं।यानी आने वाले समय में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ ऐसे हुनर सीखने का अवसर मिल सकता है, जिनकी मांग बदलती तकनीकी दुनिया में लगातार बढ़ रही है।
शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश
व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए हैं। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि व्यावसायिक शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए केवल एक अतिरिक्त विषय के रूप में नहीं, बल्कि कैरियर के विकल्प के तौर पर विकसित किया जाए।
मंत्री ने आईटीआई और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने का भी निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक डिग्री के अलावा तकनीकी और कौशल आधारित करियर विकल्पों के बारे में जानकारी देना है।
उद्योगों की जरूरत के हिसाब से तैयार होगा सिलेबस
नई व्यवस्था में पाठ्यक्रम तैयार करते समय रोजगार बाजार और उद्योगों की जरूरत को भी ध्यान में रखने की तैयारी है। बैठक में कहा गया कि जिन ट्रेड की उपयोगिता कम हो चुकी है, उनकी जगह ऐसे नए कोर्स शामिल किए जाएं, जिनसे विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल मिल सके। इसके लिए निफ्ट और अन्य तकनीकी शिक्षण संस्थानों से भी संपर्क करने की संभावना है। इससे स्कूल स्तर पर ही विद्यार्थियों को तकनीक और इंडस्ट्री से जुड़ी बुनियादी जानकारी देने की कोशिश होगी।
शिक्षा विभाग की यह पहल लागू होती है तो बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का दायरा केवल परीक्षा और अंक तक सीमित नहीं रहेगा। किताबी ज्ञान के साथ स्किल, तकनीक और रोजगार की तैयारी को भी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाने की दिशा में काम होगा।





