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बिहार में इको-टूरिज्म को मिलेगा नया स्वरुप, यह 70 टूरिस्ट प्लेस बनेंगे पर्यटकों की पहली पसंद

Bihar News: बिहार सरकार इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 50 से अधिक नए पर्यटन स्थलों का विकास कर रही है। अगले पांच वर्षों में राज्य में इको-टूरिज्म स्थलों की संख्या बढ़कर 60-70 होने की उम्मीद है, जिससे पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
© AI
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार सरकार पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए इको-टूरिज्म को प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में वर्तमान में 10 से 15 सक्रिय इको-टूरिज्म स्थल हैं, जबकि 24 से अधिक प्रमुख स्थलों को विकसित करने का काम तेज गति से चल रहा है। इनमें वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, झीलें, जलप्रपात और पहाड़ियां शामिल हैं। सरकार ने 50 से अधिक नए स्पॉट्स चिन्हित किए हैं, जिससे अगले 5 वर्षों में कुल इको-टूरिज्म स्थलों की संख्या 60-70 तक पहुंचने की उम्मीद है। 



राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (पश्चिम चंपारण) सबसे प्रमुख है, जो बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व है। तराई वनों, बाघों, हाथियों और विविध वन्यजीवों से भरपूर यह क्षेत्र नेपाल सीमा से सटा हुआ है। अन्य महत्वपूर्ण स्थलों में कैमूर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी (झरनों और ट्रेकिंग के लिए प्रसिद्ध, दूसरे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित हो रहा), भीम बांध वाइल्ड लाइफ सैंक्, गौतम बुद्ध वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, विक्रमशीला गंगा डॉल्फिन सैंक्चुअरी (नाव यात्रा से डॉल्फिन देखने का अनोखा अनुभव), कांवर झील पक्षी अभ्यारण्य (एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील, सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग), राजगीर के पठार (ट्रेकिंग, हॉट स्प्रिंग्स और ग्लास ब्रिज), काकोलत जलप्रपात, घोरा कटोरा, बराबर-गुरूपा पहाड़ियां तथा सूरजपुर वेटलैंड्स जैसे क्षेत्र शामिल है।



सहरसा स्थित मत्स्यगंधा झील पर सोमेनियर शॉप, सुपर ट्री, ग्लास ब्रिज और एक्सपीरियंस सेंटर समेत अन्य सुविधाएं वर्ष 2026 तक पूरी कर ली जाएंगी। पश्चिम चंपारण के लव कुश पार्क और बाल्मीकि नगर में आइकॉनिक टूरिज्म पार्क का व्यापक विकास कार्य 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा मां मुंडेश्वरी धाम में धर्मशाला का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जंगल सफारी और इको-टूरिज्म गतिविधियों को विशेष बढ़ावा दिया जाएगा। इन सभी स्थलों पर नेचर ट्रेल्स, वॉच टावर, इको-कॉटेज, होमस्टे, डिजिटल साइनेज और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएगी हैं।



बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने बताया कि बिहार इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य स्थाई पर्यटन को बढ़ावा देना है, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके। इन प्रयासों से न केवल देश-विदेश के पर्यटक आकर्षित होंगे, बल्कि बिहार की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर की भी रक्षा होगी। सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में अगले 5 वर्षों में 20 लाख रोजगार देने का लक्ष्य रखा है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता